नई दिल्ली: “मासूम से बच्चे भी मजहबी तराजू में तोले जाते हैं, पर हम नहीं समझते घर के नन्हें भी जानते हैं इसे किसने बनाया।” धर्म पर बड़े-बुजुर्ग क्या सोचते है इसे हर कोई जानता है, लेकिन नन्हे और मासूम बच्चे इसके बारे में क्या राय रखते हैं इसे शायद चंद लोग ही जानते होंगे। आबादी के एक बड़े हिस्से को भरने वाले बच्चे धर्म के बारे में ऐसी बेबाक राय रखते हैं जो मजहब के ठेकेदारों के रोंगटे खड़ी कर सकती है। कहते हैं कि बचपन मासूमियत का उत्सव होता है, लेकिन यह मासूमियत कभी-कभी ऐसी चोट दे देती है जो बमुश्किल भरती है। हम जिस वीडियो को आपको दिखाने जा रहे हैं वो कई सवाल खड़े करती है।
क्या वाकई में धर्म कुछ होता भी है? क्या धर्म का अस्तित्व जरूरी था? धर्म से किसको क्या मिला? धर्म को किसने बनाया? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो आपको अंदर तक झकझोर देंगे।
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