नई दिल्ली: महाराष्ट्र में फिर एक बार धार्मिक जगहों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ जंग शुरू होने जा रही है। महिलाओं को इबादत का समान हक दिलाने के लिए भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई आज मुंबई की हाजी अली दरगाह का रुख करेंगी, लेकिन उनके इस कदम के विरोध में एमआईएम और धार्मिक संगठन एक साथ हो गए हैं।
इसके पहले तृप्ति शनि शिगनापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए आंदोलन कर चुकी हैं। तृप्ति देसाई का कहना है कि इस दरगाह पर वे वहां तक जाना चाहती हैं जहां तक पुरुष जाते हैं।
इस मुद्दे पर हाजी राफत ने कहा है कि महिलाओं का मजार शरीफ पर जाना हराम है, अगर उन्होंने इस प्रकार की कोई कोशिश की, तो उन्हें अंजाम भुगतना होगा।
मुस्लिम धर्मगुरु उमर अहमद इलियास ने कहा कि मस्जिद और दरगाह अलग अलग जगह होती है। मजार और कब्रस्तान पर औरतों के जाने की मनाही है। अगर वह जाती हैं तो इसके गुनाहगार वहीं होगीं।
खालिद रशीद का कहना है कि किसी भी इबादतगाह का मतलब यह होता है कि हम वहां जाकर सुकून हासिल करें। उन्होंने कहा कि यह रास्ता जो अपनाया जा रहा है बेमानी है और इससे मजहबों के दरमियां टकराव की सूरत पैदा होगी।
बीजेपी नेता मनीषा कयांदे का कहना है कि तृप्ति के पीछे किसका हाथ है यह ढूंढ़ा जाना चाहिए। धर्म के नाम पर प्रसिद्धि पाना गलत है। बीजेपी नेता शाइना एनसी का कहना है कि बीजेपी मानती है कि महिलाओं और पुरुष के समान अधिकार हैं।