नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय से यहां की एक विशेष अदालत ने 2017 उन्नाव बलात्कार पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए एम्स में बंद कमरे में सुनवायी की बुधवार को अनुमति मांगी। चिकित्सकों ने कहा है कि पीड़िता को अदालत परिसर में लाने की सलाह नहीं दी जा सकती । जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को सूचित किया कि सीबीआई, बलात्कार पीड़िता और उसके परिवार को इस तरह से बयान दर्ज कराने में कोई ‘‘आपत्ति नहीं’’ है, लेकिन आरोपी एवं भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और सह आरोपी शशि सिंह ने इसका विरोध किया।
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अदालत ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए अनुरोध के विस्तार के तहत इस आदेश की एक प्रति कल रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजी जाए कि सीआरपीसी की धारा 9 (6) के संदर्भ में अदालत द्वारा बयान दर्ज कराने के लिए दिये गये सुझाव पर आरोपी व्यक्ति और उनके वकील सहमत नहीं हैं। हालांकि, सीबीआई और शिकायतकर्ता के वकील को इस तरह के बयान दर्ज कराने पर कोई आपत्ति नहीं है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘यह अदालत इस संबंध में सीआरपीसी की धारा 9 (6) के तहत आवश्यक अधिसूचना के लिए उच्च न्यायालय से अनुमति मांग रही है।’’ अदालत पीड़िता के 2017 में कथित अपहरण और बलात्कार के मामले की सुनवायी कर रही है। घटना के वक्त नाबालिग थी। उसकी कार को 28 जुलाई को एक ट्रक ने टक्कर मार दिया था जिसके बाद से वह अस्पताल में भर्ती है।