नई दिल्ली: भारत में "मैगी" बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का फूडसेफ्टी और ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग, नेस्ले कंपनी पर फूड एंड सेफ्टी एक्ट, 2006 के तहत आज बाराबंकी में मुकदमा दर्ज कराएगी।
उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि, अगर इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (NCDRC) में कोई शिकायत दर्ज की जाती है तो इस पर एक विशेष उपभोक्ता वर्ग की ओर से कार्रवाई का मामला शुरू किया जा सकता है।
नेस्ले इंडिया कंपनी द्वारा मैगी के सैम्पल को कोलकाता लैब में टेस्ट करवाने का दावा भी झूठा साबित हुआ है। कंपनी ने दावा किया था कि उसने मैगी के एक पैकेट का सैंपल जांच के लिए बाराबंकी के खाद्य अधिकारी की मदद से कोलकाता की लैब में भिजवाया था, लेकिन बाराबंकी के खाद्य सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक कंपनी ने जांच कराने के लिए कोई प्रार्थना पत्र ही नहीं दिया।
पिछले महीने यूपी खाद्य सुरक्षा एवं दवा प्रशासन ने नेस्ले इंडिया को आदेश दिया कि फरवरी 2014 में बने मैगी नूडल बाजार से वापस ले ले। प्रशासन ने पाया था कि नूडल में स्वाद बढ़ाने के लिए मिलाया जाने वाला रासायनिक योगिक एमएसजी के साथ लेड (सीसे) की मात्रा स्वीकृत सीमा से बहुत अधिक है।
केंद्र सरकार ने भी मैगी गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे को 'गंभीरता' से लिया है। अब सरकार इस मामले की जांच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकारण से कराऐगी।
मामले में मैगी आटा नूडल्स का विज्ञापन करने वाली फिल्म अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को भ्रामक प्रचार करने के आरोप में नोटिस भेजा गया था।