
धैर्य धारण करना
यदि कोई व्यक्ति हर कार्य जल्दबाजी में करता है, बिना विचारे ही त्वरित निर्णय कर लेता है और बाद में हानि उठाता है। इस बारें में चाणक्य ने कहा कि ऐसे लोगों को धैर्य की शिक्षा देना भी समय की बर्बादी ही है, क्योंकि यह गुण व्यक्ति को जन्म के साथ ही उसके स्वभाव में रहता है। धैर्य एक ऐसा गुण है जिसे विपरीत परिस्थितियों में धारण करने से ही बुरे समय को दूर किया जा सकता है।