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नेहरू बहुत देर बाद समझ पाए कि चीन पर भरोसा कर गलती की: वेंकटस्वरन

 Written By: IANS
 Published : Jul 16, 2015 10:17 am IST,  Updated : Jul 16, 2015 10:19 am IST

नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू बहुत देर हो जाने के बाद यह समझ पाए कि चीन अपने अलावा किसी और का अच्छा मित्र नहीं हो सकता। दिवंगत विदेश सचिव ए.पी.वेंकटस्वरन ने विदेश मंत्रालय के ओरल

नेहरू ने चीन पर भरोसा...- India TV Hindi
नेहरू ने चीन पर भरोसा कर गलती की: वेंकटस्वरन

नई दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू बहुत देर हो जाने के बाद यह समझ पाए कि चीन अपने अलावा किसी और का अच्छा मित्र नहीं हो सकता। दिवंगत विदेश सचिव ए.पी.वेंकटस्वरन ने विदेश मंत्रालय के ओरल हिस्ट्री परियोजना को दिए लंबे साक्षात्कार में यह बात कही थी, जो अब एक किताब रूप में प्रकाशित हुई है। वेंकटस्वरन ने विदेश सचिव का पदभार 1987 में छोड़ा था, जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। वह 1962 से 1964 के उत्तरार्ध तक विदेश मंत्रालय में चीन के मामलों के उप विदेश सचिव थे।

उन्होंने साक्षात्कार में कहा कि भारत को तभी जाग जाना चाहिए थे, जब चीन ने तिब्बत पर हमला किया।

उनके अनुसार ल्हासा की तत्कालीन भारतीय राजनयिक सुमल सिन्हा ने नई दिल्ली को अपने संदेश में कहा था, "चीनी तिब्बत में प्रवेश कर चुके हैं। भारत तथा चीन के बीच जो हिमालय की दीवार है, वह ढहने के कगार पर है।"

वेंकट फॉरेवर (कोनार्क पब्लिकेशन) पुस्तक के अनुसार, वेंकटस्वरन ने कहा, "इस हिला देने वाले टेलीग्राम के बावजूद भारत पर कोई असर नहीं हुआ, जबकि होना चाहिए था।"

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि इसका हमारे महान नेता जवाहर लाल नेहरू पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और वह कहते रहे कि भारत तथा चीन एशिया तथा विश्व को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे।"

उन्होंने कहा, "नेहरू इस बात को पूरी तरह नहीं समझ पाए थे कि चीन अपने अलावा किसी का सच्चा दोस्त नहीं हो सकता।"

वेंकटस्वरन ने कहा, "80 के दशक के उत्तरार्ध में चीन में प्रवास के दौरान मैं समझ गया था कि चीन अपने अलावा किसी का मित्र नहीं हो सकता।"

वह कहते हैं कि चीन के मामले में नेहरू खुद पीड़ित थे क्योंकि उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने उन्हें आगाह करते हुए दो पत्र लिखे थे।

उन्होंने कहा, "पटेल ने उन्हें लिखा था कि चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया है और चीन अब हमारा नजदीकी पड़ोसी बन गया है और हमें एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है, लेकिन नेहरू ने इस सलाह पर ध्यान नहीं दिया।"

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