नई दिल्ली: गुजरात के दाहोद जिले के झारीबउझी गांव के 35 वर्षीय राम सिंह और उनकी 33 वर्षीय पत्नी कानू के सपने एक बार फिर टूट गए। 14 बेटियों और एक 1 बेटे के पिता राम सिंह को आशा थी कि उनकी पत्नी की गर्भ में पल रहे बच्चा इस बार लड़का होगा ताकि उनका दो बेटों का सपना पूरा हो जाए, लेकिन वो पूरा नहीं हो सका।
हाल ही में कानू ने एक लड़की को जन्म दिया है, जो इस परिवार की 15 वीं लड़की है। इस लड़की की जन्म के बाद राम सिंह का कहना है कि वे अभी एक और बार प्रयास करेंगे कि उन्हें लड़का हो जाए।
झारीबुझी गांव के किसान राम सिंह की सबसे बड़ी बेटी 17 साल की है, जबकि दूसरी की उम्र 15 साल है। इन दोनों की शादी पिछले साल हो चुकी है। तीन बेटियां अभी प्राइमरी स्कूल में पढ़ रही हैं। बेटा करीब दो साल का है। एक बेटी का जन्म इसी महीने की 2 तारीख को हुआ है।
वहीं राम सिंह इस बच्ची के जन्म लेने के बाद कह रहे हैं कि हमें एक और बार प्रयास करना चाहिए। कानू का कहना है कि वो अभी इस बच्ची का नाम सोच रही है। वो चाहती हैं कि उनके भविष्य के बारे में उनके पति फैसला करें।
राम सिंह के मुताबिक, "हमारे समाज में महिला के भाई को काफी खर्च करना पड़ता है। बहन के घर बच्चा पैदा होने पर उसकी ससुराल में तोहफे देने पड़ते हैं। मेरा बेटा सभी बहनों में सबसे छोटा है। वो अकेला कैसे इन खर्चों को उठा सकेगा। यही वजह है कि मैं एक बेटा और चाहता हूं। अगर भगवान ने मुझे एक बेटी और दी तो मैं उम्मीद यही करूंगा कि अगली बार वह मुझे एक बेटा भी देंगे।"
वहीं उनकी पत्नी कानू संगोड कहती हैं, 'मैंने अपने पति से कहा कि हमें ईश्वर की इच्छा समझकर इसे स्वीकार कर लेना चाहिए। ईश्वर चाहता है कि हमारे बस एक ही बेटा हो। हमें अब एक और बेटे की अपनी कोशिशों को खत्म कर देना चाहिए। मैं अब बच्चा नहीं चाहती। मैं अब ऑपरेशन करा लेना चाहती हूं। मेरा शरीर कमजोर हो गया है और अब मुझमें इतनी ताकत नहीं है कि मैं एक और बार गर्भधारण कर सकूं।'
राम सिंह और कानू की शादी 18 वर्ष की उम्र में हुई थी। इनके परिवार में सबसे बड़ी बेटी सेवांता है जिसकी उम्र 17 साल है और फिर निरू जिसकी शादी बीते मार्च में हुई है वो अभी 15 साल की है। उसके बाद सारंग(14), हंसा(13), जोशना(12), रंजन(10), मीना(9) पायल (8), मोनी(7), हसीना (5)किंजल (4), बैगन (3) और विजय (18 माह) का है।