नई दिल्ली: किसी रिलेशनशिप में बुनियादी तौर पर यह महिला की जिम्मेदारी है कि वह अपनी मान-मर्यादा और शील की रक्षा करे, यह कहना है हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का। कोर्ट ने कहा कि महिला से यह अपेक्षित नहीं है कि वह स्वयं को अपने पुरुष साथी पर न्योछावर कर दे।
कोर्ट ने यह बात रेप के आरोपी शादीशुदा शख्स की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।
महिला से रेप के आरोपी शादीशुदा व्यक्ति बलदेव राज की जमानत मंजूर करते हुए अदालत ने कहा कि पीड़ित और आरोपी दोनों अनजान हीं थे, इसके अलावा दस्तावेज भी इशारा करते हैं कि दोनों का रिश्ता 'दोस्ती से बढ़कर' था।
एक बच्चे की मां और विधवा महिला ने पुरुष पर यह कहते हुए रेप का आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ करीब डेढ़ साल तक रेप किया। अदालत ने कहा कि दस्तावेज बताते हैं कि यह मामला रिश्ते खराब होने का है न कि रेप का।
आरोपी की बेल मंजूर करते हुए जस्टिस चौहान ने कहा, 'पीड़िता जब यह जानती थी कि वह पुरुष शादीशुदा है तो उसे अपना ख्याल खुद ही रखना चाहिए था। उसे अंतरंग रिश्ते बनाने से पहले विचार करना चाहिए था।'
अदालत ने कहा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि पुरुष की यह नैतिक और सैद्धांतिक जिम्मेदारी है कि वह किसी महिला का संबंध बनाने के लिए उत्पीड़न न करे। लेकिन यह महिला की भी जिम्मेदारी है, जो अपने शरीर की खुद भी रक्षक है। उसका यह पहला दायित्व है कि किसी भी रिश्ते में अपने शरीर की भी रक्षा करे।'
आरोपी के खिलाफ महिला ने 28 जुलाई को छोटा शिमला पुलिस थाने में रेप की शिकायत दर्ज कराई थी।