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जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए साल 2015 रहा ऐतिहासिक, भाजपा ने चखा सत्ता का स्वाद

 Written By: PTI
 Published : Dec 25, 2015 06:56 pm IST,  Updated : Dec 25, 2015 06:56 pm IST

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए यह साल ऐतिहासिक रहा और पिछले साल नवंबर-दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु सदन बनने के बाद पीडीपी के साथ गठबंधन करने से भाजपा पहली बार राज्य में

Year 2015 historical for Jammu and Kashmir Politics- India TV Hindi
Year 2015 historical for Jammu and Kashmir Politics

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए यह साल ऐतिहासिक रहा और पिछले साल नवंबर-दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु सदन बनने के बाद पीडीपी के साथ गठबंधन करने से भाजपा पहली बार राज्य में सत्ता में आई। इसके अलावा, राज्य में गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध का मुद्दा भी राजनीतिक परिदृश्य में खूब छाया रहा। जम्मू उच्च न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिए थे कि वह गोहत्या मामले पर स्वतंत्रता से पूर्व के कानून को सख्ती से क्रियान्वयन करे। यह मुद्दा विधानसभा के शरद सत्र में गूंजा।

इस मुद्दे ने उस समय भद्दा रूप ले लिया, जब भाजपा के कम से कम तीन विधायकों ने कथित तौर पर विधायक हॉस्टल के अंदर एक बीफ पार्टी की मेजबानी करने के सिलसिले में कश्मीर के एक निर्दलीय विधायक पर कथित रूप से हमला कर दिया। इस बीच, गोमांस प्रतिबंध के मुद्दे पर पसोपेश बना रहा, क्योंकि उच्च न्यायालय की श्रीनगर पीठ ने प्रतिबंध के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कहा था कि गोवंश वध को अपराध से मुक्त करने की याचिका पर वह अपना जवाब दाखिल करे।

राज्य ने इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में जाने का रास्ता चुना, लेकिन शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिए कि वह इसका निपटान करे। राज्य की दो पीठों के परस्पर विरोधी आदेशों को दरकिनार करते हुए उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने इस मामले को यह कहकर सरकार के पाले में डाल दिया कि वह इस मुद्दे का समाधान करे।

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