नई दिल्ली: सलमान खान की आने वाली फिल्म बजरंगी भाई जैसी है जाहिद की जिंदगी की कहानी। जिस तरह बजरंगी भाईजान में सलमान अपना घर भूल चुकी एक बच्ची को उसके घर पहुचाने में मदद करते है लगभग कुछ ऐसा ही वाक्या जाहिद की जिंदगी का है।
23 साल के जाहिद की जिंदगी का करीब 15 साल पहले मेवात से किडनेप हुआ था।
अब जाहिद 15 साल बाद ईद पर अपने परिवार से मिलेगा। कहानी कुछ इस तरहा है कि करीब 15 साल पहले जाहिद का मेवात से किडनेप हुआ था। वह मर्डर के एक मामले में गवाह था। जाहिद की उम्र उस समय मात्र 8 साल थी।
गवाही से बचने के लिए आरोपियों ने उसका अपहरण किया और अपहरण कर जाहिद को करीबन 2500 किलोमीटर दूर कर्नाटक में छोड़ आये। जाहिद अपनों से बिछुड़ चूका था। यहाँ धक्के खाते खाते उसने एक मस्जिद मे पनाह ली जहां एक केबल ऑपरेटर फारुक पाशा उन्हें अपने साथ ले गए। यहाँ जाहिद, फारूक के सहायक के तौर पर काम करने लगा और यहीं की अकीला बानो के साथ निकाह कर लिया।
जाहिद के दो बच्चे भी हैं। जाहिद अपने आप को सेट कर चूका था पर अपनों से खोने का गम उसे लगातार खाए जा रहा था। उसे सिर्फ इतना ही याद था की उसके पापा का नाम अकबर है और गांव का नाम सुनेदा है जो की हरियाणा में है। इससे ज्यादा उसे कुछ और ध्यान नहीं था।
कुछ दिन पहले जब वह घर पर tv देख रहा था तो उसे हरियाणा के जींद के बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जागलान का सेल्फ़ी विद डॉटर कार्यकर्म देखा (आपको बता दे कि हरियाणा में बेटी के साथ सेल्फी कार्यक्रम आयोजित किया गया था)। कार्यकर्म मे सरपंच सुनील जागलान का मोबाइल नंबर भी दिखाया जा रहा था। जाहिद नेहरियाणा के एक सरपंच का नंबर देख उस पर फ़ोन कर दिया और जींद के गांव बीबीपुर के सरपंच सुनील जागलान को अपनी सारी आपबीती सुनाई। बीबीपुर के सरपंच सुनील जागलान ने सब कुछ सुना। जाहिद ने जैसा बताया उसके अनुसार सरपंच सुनील जागलान ने सुनेदा गांव ढूंढने के लिए प्रयास शुरू किये गए।