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सिर्फ डॉलर नहीं, AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी भी तय करेंगे BRICS की ताकत!

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Sep 12, 2026 05:27 pm IST,  Updated : Sep 12, 2026 05:57 pm IST

BRICS अब सिर्फ डॉलर, व्यापार और जियोपॉलिटिक्स का मंच नहीं रह गया है। बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में इसका फोकस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, डिजिटल पेमेंट्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों पर भी बढ़ रहा है। इस नए टेक्नोलॉजी एजेंडे में भारत अहम भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

BRICS Summit- India TV Hindi
ब्रिक्स सम्मेलन 2026 Image Source : PTI

नई दिल्ली: BRICS सम्मेलन 2026 में तमाम सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद हैं और वैश्विक व्यवस्था पर गहन मंथन जारी है।  बदलती वैश्विक व्यवस्था में BRICS का एजेंडा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, डिजिटल पेमेंट्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच गया है। यानी BRICS में ताकत का पैमाना अब केवल करेंसी और बाजार नहीं, बल्कि तकनीक और डिजिटल क्षमता भी बन रही है। 

स्थानीय करेंसी में व्यापार पर जोर

इससे पहले ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर की बैठक में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने पर चर्चा हुई थी। हालांकि संयुक्त बयान में  डॉलर को हटाने का कोई उल्लेख नहीं किया गया। इस बयान में स्थानीय करेंसी में व्यापार और निवेश तथा सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। इस बदलते एजेंडे में भारत की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI, AI और टेक्नोलॉजी आधारित पब्लिक सर्विस के अपने अनुभव को BRICS के साझा प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

कॉमन पेमेंट सिस्टम से दूर होंगी अड़चनें

रूस, ईरान और भारत ने स्पष्ट तौर पर इस बात का समर्थन किया है कि हमें स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए और पेमेंट सिस्टम को जोड़ना चाहिए। BRICS देश डॉलर के पेमंट सिस्टम को इसलिए बदलना चाहते हैं कि यह पैसा अक्सर कॉरेस्पोंडेंट बैंकों की एक चेन से गुज़रता है, जिसमें अलग-अलग करेंसी, रेगुलेशन और सेटलमेंट सिस्टम शामिल होते हैं। ट्रांज़ैक्शन में करेंसी कन्वर्ज़न चार्ज, इंटरमीडियरी बैंक फीस और सेटलमेंट में देरी हो सकती है। ऐसे में एक कॉमन पेमेंट सिस्टम इन अड़चनों को दूर कर ट्रांजैक्शन को आसान बना सकता है।

भारत के यूपीआई की भूमिका

अब डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की कोशिश में भारत की भूमिका अहम हो जाती है। क्योंकि भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) ने यह साबित कर दिखाया है कि एक बड़े घरेलू फाइनेंशियल इकोसिस्टम में पेमेंट लगभग तुरंत प्रोसेस किए जा सकते हैं। भारत पहले से ही कई देशों में पेमेंट सिस्टम के साथ लिंकेज के ज़रिए विदेशों में UPI की पहुंच बढ़ाने के लिए काम कर रहा है। हालांकि इस संबंध में BRICS का मकसद बेहद प्रैक्टिकल है। BRICS देश ट्रेड और सेटलमेंट के लिए नेशनल करेंसी के ज़्यादा इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। हर ट्रांज़ैक्शन को डॉलर में बदलने के बजाय, दो देश अपने ज़्यादातर ट्रेड का सेटलमेंट सीधे अपनी करेंसी में कर सकते हैं।

भारत को क्या फायदा होगा?

भारत के लिए सबसे बड़ा संभावित फायदा रुपये का ज़्यादा इंटरनेशनल इस्तेमाल है। अगर ज़्यादा भारतीय एक्सपोर्टर और इंपोर्टर सीधे रुपये में ट्रेड सेटल कर सकें, तो करेंसी की डिमांड बढ़ सकती है। इससे डॉलर के ज़रिए ट्रांज़ैक्शन करने की वजह से होने वाले एक्सचेंज-रेट मूवमेंट से उनका रिस्क भी कम हो सकता है। भारतीय बिज़नेस के लिए, कम ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट और तेज़ सेटलमेंट, छोटे एक्सपोर्टर, टूरिज्म और सर्विसेज़ के लिए खास तौर पर फायदेमंद हो सकते हैं। ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम और पश्चिमी फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर डॉलर पर निर्भर है। ऐसे में यह कोशिश होनी चाहिए कि जब जियोपॉलिटिकल टेंशन, बैन या रुकावटें पारंपरिक पेमेंट चैनल पर असर डालें तो उसके पास दूसरे ऑप्शन हों।ऐसी व्यवस्था डेवलप होनी चाहिए कि बिना बिचौलियों के नेटवर्क पर निर्भर हुए  एक देश में होने वाला पेमेंट दूसरे देश में डिजिटल तरीके से किया जा सके। बता दें कि नई दिल्ली में BRICS के 11 देशों के प्रतिनिधि इकट्ठा हुए हैं। इन देशों के जुड़ाव को ग्लोबल पावर बैलेंस को बदलने की उम्मीद पर देखा जा रहा है। 

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