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VIDEO: दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बनेगा ‘वरुणास्त्र’ और ‘श्येना’, DRDO ने विकसित किया स्वदेशी टॉरपीडो, जानें इसकी ताकत

 Reported By: Manish Prasad Edited By: Niraj Kumar
 Published : May 13, 2026 09:55 pm IST,  Updated : May 13, 2026 09:56 pm IST

डीआरडीओ ने भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अत्याधुनिक स्वदेशी टॉरपीडो विकसित किया है। इनमें वरुणास्त्र और श्येना प्रमुख हैं। आइये जानते हैं इनकी क्षमता के बारे में।

Torpedo- India TV Hindi
स्वदेशी टॉरपीडो Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली:  भारतीय नौसेना को एक नई ताकत मिली है। यह ताकत दुश्मन देशों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर देगी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय नौसेना की एंटी सबमेरिन वारफेयर (ASW) क्षमता को मजबूत करने के लिए कई अत्याधुनिक स्वदेशी टॉरपीडो विकसित किया है। इनमें सबसे खास है ‘वरुणास्त्र’ और TAL ‘श्येना’। वरुणास्त्र एक हैवीवेट टॉरपीडो है जबकि ‘श्येना’ एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो है। इन्हें DRDO की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी ने विकसित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजकर नष्ट करना है।

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वरुणास्त्र

वरुणास्त्र की बात करें तो यह शिप-लॉन्च्ड हैवीवेट टॉरपीडो है। यह इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर आधारित है। वरुणास्त्र गहरे और उथले दोनों पानी में काम कर सकता है। यह आधुनिक काउंटरमेजर एनवायरनमेंट में भी टरगेट को ट्रैक कर सकता है। साथ ही यह कम आवाज़ वाली यानी Quiet Submarines का भी पता लगा सकता है।

श्येना

वहीं एडवांस्ड लाइट वेट टॉरपीडो (TAL) श्येना भारत का पहला स्वदेशी लाइटवेट एंटी सबमैरिन टॉरपीडो है। इसे भी DRDO की NSTL लैब ने विकसित किया है। इसका उपयोग युद्धपोतों और हेलीकॉप्टरों से दुश्मन की पनडुब्बियों पर हमला करने के लिए किया जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इन स्वदेशी टॉरपीडो के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

स्वदेशी 'स्टेल्थ फ्रिगेट'नौसेना को सौंपा

बता दें कि इससे पहले हाल ही में अत्याधुनिक हथियार प्रणाली और उन्नत सेंसर से लैस स्वदेशी 'स्टेल्थ फ्रिगेट' महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना को सौंपा गया है। नीलगिरि श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का छठा पोत 30 अप्रैल को मुंबई स्थित मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) पर सौंप दिया गया। 

अधिकारियों की मानें तो नौसेना को एक और उन्नत पोत सौंपा जाना युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। डिफेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा, ''प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट बहुउद्देशीय पोत हैं जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।'' उन्होंने बताया कि 'महेंद्रगिरि', MDSL में निर्मित इस श्रेणी का चौथा जहाज है। युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (डब्ल्यूडीबी) द्वारा डिजाइन किए गए 'पी17ए' पोत युद्ध क्षमता में एक ''पीढ़ीगत छलांग'' को दर्शाते हैं। 

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