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15,400 टन LPG लेकर नवी मुंबई पहुंचा टैंकर, 6 अप्रैल को होर्मुज से निकला था

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Apr 09, 2026 11:17 am IST,  Updated : Apr 09, 2026 11:17 am IST

ग्रीन आशा टैंकर 15,400 टन एलपीजी लेकर 6 अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकला था। इसके साथ ही ग्रीन सानवी नाम का टैंकर भी निकला था, जो सात अप्रैल को ही भारत पहुंच चुका है।

LPG tanker Asha- India TV Hindi
एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा Image Source : X/@JNPORT

पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत का एक और टैंकर एलपीजी लेकर देश आ चुका है। इस टैंकर में 15,400 टन एलपीजी है। इससे देश की बड़ी आबादी को घरेलू गैस की सप्लाई की जाएगी। जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण ने गुरुवार को बताया कि 15400 टन एलपीजी से लदे भारतीय ध्वजाकार जहाज का उसने स्वागत किया। इस टैंकर ने छह अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया था। इस टैंकर का नाम ग्रीन आशा है। इसके साथ ही ग्रीन सानवी नाम का टैंकर भी छह अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरा था, जो पहले ही भारत पहुंच चुका है।

अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक कर दिया है। हालांकि, कुछ चुनिंदा देशों के टैंकर यहां से गुजर सकते हैं और भारत भी उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल है।

जेएनपीए ने किया टैंकर का स्वागत

जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण के अनुसार ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के बीच भारतीय टैंकर का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित निकलना बड़ी बात है। ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला टैंकर है, जो एलपीजी सप्लाई लेकर इस बंदरगाह तक पहुंचा है। एक विज्ञप्ति में जेएनपीए ने कहा, “जेएनपीए ने गर्व से ग्रीन आशा का स्वागत किया। यह भारतीय ध्वजाकार एलपीजी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार कर चुका है और बीपीसीएल-आईओसीएल द्वारा संचालित जेएनपीए के तरल बर्थ पर लंगर डाला है।”

जहाज के सभी सदस्य सुरक्षित

जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद से जेएनपीए पहुंचने वाला यह पहला ऐसा जहाज है। जहाज 15,400 टन एलपीजी लेकर आया है। जेएनपीए ने आगे कहा कि “जहाज, उसका माल और चालक दल का हर सदस्य सुरक्षित है। यह आगमन जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भी समुद्री संचालन की क्षमता को दर्शाता है। इसके साथ ही देश को आवश्यक एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है।” 

ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है जेएनपीटी

अधिकारियों ने बताया कि नवी मुंबई स्थित यह बंदरगाह, जिसे जेएनपीटी और न्हावा शेवा बंदरगाह के नाम से भी जाना जाता है, भारत के प्रमुख बंदरगाहों में से एक है, जो कंटेनर और तरल माल का संचालन करता है और देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पश्चिम एशिया संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इससे भारत में भी ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि, सरकार ने दूसरे विकल्पों से तेल खरीदकर आपूर्ति जारी रखी है।

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