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लश्कर आतंकी शब्बीर अहमद का खुलासा, "कालकाजी मंदिर, लोटस टेंपल-छतरपुर मंदिर की रेकी के बाद पाकिस्तान भेजा था वीडियो"

 Reported By: Abhay Parashar Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Mar 31, 2026 10:20 am IST,  Updated : Mar 31, 2026 10:20 am IST

लश्कर आतंकी शब्बीर अहमद लोन को सोमवार को दिल्ली बॉर्डर के पास से गिरफ्तार किया गया था। उसने पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

Shabir Ahmed Lone- India TV Hindi
लश्कर आतंकी शब्बीर अहमद लोन Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली: दिल्ली बॉर्डर के पास गिरफ्तार किए गए लश्कर के आतंकी शब्बीर अहमद लोन ने पूछताछ के दौरान कई बड़े राज उगले हैं। उसने बताया है कि उसने कई कमर्शियल जगहों और धार्मिक स्थलों की रेकी की थी। इन धार्मिक स्थलों में कालकाजी मंदिर, लोटस टेम्पल और छतरपुर मंदिर शामिल थे। रेकी करने के बाद, एक वीडियो पाकिस्तान भेजा गया था। आरोपी ने कनॉट प्लेस का वीडियो भी बनाया था।

लोन ने बताया कि ISI 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की तर्ज पर एक आतंकी संगठन बनाना चाहती थी। TRF ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमला किया था।

शब्बीर अहमद लोन नेटवर्क का खुलासा

शब्बीर अहमद लोन, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स आसिफ डार और सुमामा बाबर के साथ नियमित संपर्क में रहता था। आसिफ डार, जो मूल रूप से सोपोर का रहने वाला है और फिलहाल पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां चला रहा है, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर @YD_17 ​​नामक एक एनक्रिप्टेड हैंडल का इस्तेमाल करके इन गतिविधियों का समन्वय करता था।

लोन अक्सर अपनी एनक्रिप्टेड चैट पहचान बदलता रहता था, लेकिन बाद में उसने हैंडलर्स और मॉड्यूल के सदस्यों से बातचीत करने के लिए एक खास मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया; जांचकर्ताओं का कहना है कि इसी नंबर की मदद से इस नेटवर्क का पता लगाने में सफलता मिली।

खबरों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेटिव्स - अबू हुजैफा, अबू बकर और फैसल - लोन के इलाके में आए थे, जहां उन्हें साजो-सामान संबंधी मदद (लॉजिस्टिकल सपोर्ट) मुहैया कराई गई थी।

अबू हुजैफा ने ही लोन को लश्कर-ए-तैयबा में शामिल किया था। लोन ने 'दौरा-ए-आम' नामक 21-दिवसीय बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा किया, जिसमें उसे छोटे हथियारों और ग्रेनेड के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया।

इसके बाद उसने 'दौरा-ए-खास' पूरा किया; यह तीन महीने का एक उन्नत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम था, जिसमें उसे AK-सीरीज़ की राइफलों, रॉकेट लॉन्चरों, IEDs और लाइट मशीन गनों (LMGs) को चलाने का प्रशिक्षण दिया गया।
लोन को मुजफ़्फराबाद स्थित लश्कर-ए-तैयबा के एक शिविर में 'दौरा-ए-सूफा' के लिए भी भेजा गया था; यह एक ऐसा कार्यक्रम था जिसका मुख्य उद्देश्य वैचारिक रूप से कट्टर बनाना और नए सदस्यों की भर्ती करना था।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस (ISI) ने कथित तौर पर लोन को बांग्लादेश भेजा था, ताकि वह वहां से भारत को निशाना बनाने वाली एक ऑपरेशनल सेल (कार्यकारी इकाई) स्थापित कर सके।

स्थानीय बांग्लादेशी महिला से शादी भी की

मार्च 2025 में, लोन अपने परिवार के साथ भारत-बांग्लादेश सीमा पार करके बांग्लादेश के सैदपुर क्षेत्र में जा बसा और वहां उसने अपना एक 'लॉन्चिंग बेस' (आतंकी गतिविधियों का केंद्र) स्थापित कर लिया। पहचान छिपाने और किसी भी तरह के शक से बचने के लिए, उसने कथित तौर पर वहीं की एक स्थानीय बांग्लादेशी महिला से शादी कर ली।

इसके बाद, लोन ने भारत के भीतर आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए, जम्मू-कश्मीर के बाहर स्थित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बांग्लादेशी और भारतीय युवाओं की भर्ती की।

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