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हिंदुस्तान वापस लाया गया नशे के कारोबार में मोस्ट वॉन्टेड नवप्रीत, गृह मंत्री अमित शाह ने दोहराई दिसंबर 2029 तक हर ड्रग-कार्टेल को खत्म करने की बात

 Reported By: Manish Prasad,  Written By: Vinay Trivedi
 Published : Oct 03, 2026 08:14 pm IST,  Updated : Oct 03, 2026 08:14 pm IST

नशे के कारोबार में मोस्ट वॉन्टेड नवप्रीत सिंह तुर्की से वापस भारत लाया गया है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोहराया है कि वह दिसंबर, 2029 तक हर ड्रग-कार्टेल को खत्म करके रहेंगे।

Navpreet Singh Deportation- India TV Hindi
तुर्की से वापस लाया गया नशे के कारोबार में मोस्ट वॉन्टेड नवप्रीत सिंह। Image Source : ANI

पंजाब में नशे के कारोबार में मोस्ट वॉन्टेड नवप्रीत सिंह को डिपोर्ट करके आज (शनिवार को) हिंदुस्तान वापस लाया गया। ये नशे के खिलाफ भारत की बड़ी जीत है। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद खत्म करने की तारीख दी थी और करके दिखाया भी। अमित शाह ने अब पंजाब समेत पूरे देश में नशा खत्म करने की तारीख भी दे दी है। इसके साथ ही, पंजाब में नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन भी शुरू हो चुका है। पंजाब में नशा करोबार सिर्फ बीजेपी का मुद्दा नहीं है, बल्कि अब ये अमित शाह के लिए भी निजी मिशन दिखाई देता है।

तुर्की से वतन वापस लाया गया नवप्रीत सिंह

मोस्ट वॉन्टेड नवप्रीत सिंह को भारत वापस लाए जाने पर खुशी जताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया, 'मोदी सरकार ने तुर्की से कुख्यात ड्रग तस्कर नवप्रीत सिंह को डिपोर्ट करवाकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। नवाब विर्क की फर्जी पहचान का इस्तेमाल करके तुर्की की नागरिकता लेने के बाद भी, वह अफगानिस्तान से भारत में हेरोइन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता रहा। हमारी एजेंसियों ने उसका पता लगाया, उसकी असली पहचान का खुलासा किया और उसे डिपोर्ट करवाया। आज उसे भारत वापस लाया गया है और ड्रग तस्करी व अन्य अपराधों के मामलों में जेल भेज दिया गया है। इस सफलता के लिए सभी एजेंसियों को बधाई। मोदी सरकार दिसंबर, 2029 से पहले हर ड्रग-कार्टेल को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।'

चुनाव आते ही पंजाब में उछल जाता है ड्रग्स का मुद्दा

गौरतलब है कि पंजाब में जब भी चुनाव आता है तो ड्रग्स की बात याद आ जाती है। 2017 में आम आदमी पार्टी जब जमीन तलाशने के लिए पंजाब पहुंची थी तो उनका पहला डायलॉग नशे के खिलाफ था। पूरा चुनाव नशे को मुद्दा बनाकर लड़ा। 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी लेकिन पंजाब में नशा खत्म नहीं हुआ। बीजेपी जानती है कि पंजाब का जमीनी मुद्दा नशा है और इसी रास्ते से उसकी पंजाब में दमदार एंट्री हो सकती है। वो बात अलग है कि शिरोमणि अकाली के साझेदार बीजेपी रही है तो अबकी बार बीजेपी क्या अलग करेगी, जो पहले नहीं कर पाई थी।

2027 के इलेक्शन से पहले भी हो रही ड्रग्स खत्म करने की बात

सवाल आम आदमी पार्टी से भी होगा, नशे के खिलाफ जंग कहां तक पहुंची। इस बार भी पंजाब में नशा सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा तो है लेकिन एक-दूसरे पर आरोप भी लग रहे हैं। राजनीति भी खूब हो रही है लेकिन सवाल अब भी वही बरकरार है कि पंजाब में नशे का कारोबार कौन खत्म करेगा, कब खत्म करेगा। इससे पहले, जालंधर की रैली में भी गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि नशा मुक्त पंजाब का वादा करते हैं, हमने जो कहा वो करके दिखाएंगे।

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