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"कोई मामला छोटा या बड़ा नहीं होता", जजों की नियुक्ति में देरी को लेकर जानें सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा

 Edited By: Shailendra Tiwari
 Published : Dec 17, 2022 09:01 am IST,  Updated : Dec 17, 2022 09:01 am IST

जजों की नियुक्ति में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई मामला छोटा या बड़ा नहीं है क्योंकि उसे नागरिकों की पुकार का जवाब देना है। हाल ही में कानून मंत्री ने कई मंचों से न्यायपालिका की आलोचना की थी।

Chief Justice DY Chandrachud- India TV Hindi
Chief Justice DY Chandrachud Image Source : PTI

केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच इस समय मनमुटाव बढ़ता ही जा रहा है। पिछले दिनों कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने विभिन्न मंचों पर कई मुद्दों पर न्यायपालिका की आलोचना की है। इसके बाद न्यायपालिका ने भी केंद्र सरकार पर पलटवार किया है। न्यायपालिका ने कहा चाहे न्यायाधीशों की नियुक्ति में लंबा विलंब हो या यह रेखांकित करना कि सुप्रीम कोर्ट के लिए कोई भी मामला बहुत बड़ा या बहुत छोटा नहीं है क्योंकि उसे नागरिकों की स्वतंत्रता की पुकार का जवाब देना है।

हाल ही में, रिजिजू ने संसद में कहा कि सुप्रीम कोर्ट को लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के बीच जमानत याचिकाओं और तुच्छ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए। मंत्री की आलोचना की अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया में, भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामलों में हस्तक्षेप करना शीर्ष अदालत का कर्तव्य है, और न्यायाधीश इसके लिए रात भर काम करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के लिए कोई मामला बहुत छोटा नहीं है

9 अलग-अलग मामलों में बिजली चोरी के लिए 18 साल की जेल की सजा पाए एक व्यक्ति को रिहा करते हुए, मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के लिए कोई मामला बहुत छोटा नहीं है और कोई भी मामला बहुत बड़ा नहीं है क्योंकि हमें अंतरात्मा की पुकार और अपने नागरिकों की स्वतंत्रता की पुकार का जवाब देना है, इसलिए हम यहां हैं..और ये कोई एक मामला नहीं है, जब आप यहां बैठते हैं और आधी रात का तेल जलाते हैं, तो आपको एहसास होता है कि हर दिन ऐसा ही एक और होता है..।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामलों में हस्तक्षेप करना शीर्ष अदालत का कर्तव्य

याचिकाकर्ता को रिहा करते हुए, अदालत ने अपने आदेश में कहा, व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार एक अविच्छेद्य अधिकार है। ऐसी शिकायतों को दूर करने में, सर्वोच्च न्यायालय अपने कर्तव्य का पालन करता है, न अधिक और न ही कम..।

क्या कहा था कानून मंत्री 

राज्यसभा में बोलते हुए, कानून मंत्री ने शीर्ष अदालत से उन मामलों को लेने की अपील की जो प्रासंगिक और उचित हैं, और आगे कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट जमानत अर्जियों और सभी तुच्छ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करता है, तो यह एक संवैधानिक अदालत के रूप में उस पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।

लंबी अदालती छुट्टियां न्याय चाहने वालों के लिए बहुत सुविधाजनक नहीं हैं- कानून मंत्री

केंद्रीय कानून मंत्री ने राज्यसभा में यह भी कहा था कि लोगों में यह भावना है कि लंबी अदालती छुट्टियां न्याय चाहने वालों के लिए बहुत सुविधाजनक नहीं हैं। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों से भरे अदालत कक्ष में शुक्रवार को कहा कि 'कल से एक जनवरी तक कोई बेंच उपलब्ध नहीं होगी'।

बता दें कि शुक्रवार सुप्रीम कोर्ट के लिए अंतिम कार्य दिवस था। अब 2 जनवरी, 2023 को दो सप्ताह के शीतकालीन अवकाश के बाद कोर्ट फिर से खुलेगा।

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