ओडिशा के ढेंकानाल जिले के हिंदोल इलाके से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस 29 वर्षीय युवक सनातन नायक को परिवार मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर चुका था, वह करीब एक महीने बाद अचानक जिंदा घर लौट आया। इस घटना के बाद परिवार और गांव के लोग हैरान हैं। मामला बालिमी थाना क्षेत्र के बरसिंगा गांव का है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिवार ने जिस शव का अंतिम संस्कार किया था, वह आखिर किसका था?
17 जुलाई को घर से निकला था सनातन
जानकारी के मुताबिक, सनातन नायक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहा था। वह 17 जुलाई को साइकिल लेकर घर से निकला था, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। काफी समय तक जब सनातन घर नहीं पहुंचा तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। परिजनों को शुरुआत में लगा कि शायद वह किसी रिश्तेदार के घर गया होगा और जल्द वापस लौट आएगा, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार की चिंता बढ़ गई।
10 दिन बाद धान के खेत में मिला था एक शव
सनातन के लापता होने के करीब 10 दिन बाद रसोल पुलिस को कुनुआ गांव के पास एक धान के खेत में एक अज्ञात युवक का शव मिला। शव काफी खराब हालत में था। बताया गया कि शव कुछ समय तक पानी में रहने के कारण बुरी तरह सड़ चुका था। पुलिस ने शव मिलने की जानकारी सनातन के परिवार को दी। हालांकि, जब तक परिवार मौके पर पहुंचा, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका था।
पत्नी ने विधवा के रीति-रिवाज शुरू कर दिए थे
पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंप दिया गया। शव की पहचान करने के दौरान परिवार ने उस पर मौजूद कपड़ों को देखकर उसे सनातन का शव समझ लिया। परिवार का मानना था कि कपड़े सनातन के ही हैं। इसके बाद उन्होंने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार ने अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराएं भी पूरी कर ली। सनातन की पत्नी ने भी खुद को विधवा मानते हुए उससे जुड़े रीति-रिवाजों का पालन शुरू कर दिया था, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे परिवार को हैरान कर दिया।
सनातन के लापता होने के करीब एक महीने बाद परिवार को गअंदिया थाना क्षेत्र के जोरांडा पुलिस चौकी से जानकारी मिली कि सनातन जिंदा है। यह खबर सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। रिश्तेदार तुरंत जोरांडा पहुंचे और सनातन को अपने साथ घर लेकर आए। इसके बाद सनातन अपने परिवार से दोबारा मिल गया। उसके जिंदा लौटने से परिवार और गांव के लोगों में खुशी और राहत का माहौल है। उसकी पत्नी ने भी विधवा के रूप में शुरू किए गए रीति-रिवाज बंद कर फिर से अपना वैवाहिक जीवन शुरू कर दिया।
सनातन जिंदा था, तो वो शव किसका था?
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अगर सनातन जिंदा था, तो उस शव की पहचान आखिर किस व्यक्ति के रूप में हुई थी, जिसका परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया? फिलहाल स्थानीय पुलिस की ओर से उस शव की वास्तविक पहचान को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सनातन की मां ने क्या बताया?
सनातन की मां मंजू नायक ने बताया कि उनका बेटा 17 जुलाई को घर से जाने के बाद वापस नहीं आया था। परिवार को उम्मीद थी कि वह किसी रिश्तेदार के घर गया होगा और लौट आएगा। कई दिनों तक तलाश करने के बावजूद जब उसका पता नहीं चला, तो परिवार परेशान हो गया। मंजू नायक के अनुसार, बाद में उन्हें कुनुआ के पास खेत में एक युवक का सड़ा-गला शव मिलने की जानकारी मिली। शव पर मौजूद कपड़ों को देखकर परिवार ने उसे सनातन समझ लिया और अंतिम संस्कार कर दिया। मंजू ने बताया कि परिवार के मन में यह सवाल भी था कि सनातन उस जगह कैसे पहुंच सकता है, क्योंकि वह आमतौर पर वहां नहीं जाता था। लेकिन कपड़ों के आधार पर उन्होंने शव को अपने बेटे का मान लिया। करीब एक महीने बाद जोरांडा पुलिस चौकी से जब उन्हें बताया गया कि सनातन जिंदा है, तो परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
अब इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि कुनुआ के खेत में मिला शव किसका था और उसकी सही पहचान कैसे होगी।
वहीं, आपको बता दें कि हाल ही में यूपी के सोनभद्र से एक अजीब मामला सामने आया। यहां 40 साल की मृत महिला को जब उसके परिजन अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट लेकर पहुंचे तो गांव के कुछ लोगों ने उसके जिंदा होने का दावा किया।
(रिपोर्ट- शुभम कुमार)
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