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कूटनीतिक विमर्श का अहम मंच है रायसीना डायलॉग, 3 दिनी आयोजन का पीएम मोदी आज करेंगे उद्घाटन

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Apr 25, 2022 09:35 am IST,  Updated : Apr 25, 2022 09:35 am IST

 इस बार के आयोजन की खासियत यह है कि नई दिल्ली के साथ वाशिंगटन और बर्लिन में भी रायसीना डायलॉग के तहत दूसरे आयोजन होंगे। 

PM Modi- India TV Hindi
PM Modi Image Source : FILE PHOTO

नई दिल्ली। सिर्फ सात वर्ष पहले 2016 में शुरू किया गया रायसीना डायलॉग सिर्फ भारतीय कूटनीति के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति के विशेषज्ञों, शोधार्थियों, राजनेताओं और नीति-निर्धारकों के बीच विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। दो वर्ष वर्चुअल तरीके से आयोजन के बाद 25 से 27 अप्रैल, 2022 तक फिर दुनियाभर के दिग्गज इस मंच के जरिये दुनिया के समक्ष मौजूदा चुनौतियों पर विमर्श करेंगे।

यूक्रेन-रूस युद्ध और अर्थव्यवस्था पर होने वाले संभावित असर पर होगा इस वर्ष मंथन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को रायसीना डायलाग का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन में दुनिया के 90 देशों के प्रतिनिधि (जिसमें 25 देशों के वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं) यूक्रेन-रूस युद्ध से लेकर क्रिप्टोकरेंसी और आपूर्ति श्रृंखला के हालात पर अपने विचार रखेंगे। विदेश मंत्रालय और आब्जर्बर रिसर्च फाउंडेशन की तरफ आयोजित इस मंच पर सिर्फ दिग्गज देशों की सरकारों की ही नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संस्थानों की भी नजर होती है।

सोमवार से शुरू हो रहा कूटनीतिक का यह महाकुंभ

इस बार के आयोजन का थीम है 'टेरा नोवा: इंपैसंड, इंपेसेंट और इंपेरिल्ड'। धरती को सबसे पुराना नाम टेरा नोवा है और इस नाम से थीम रखने के पीछे उद्देश्य यही है कि धरती को नए दृष्टिकोण से देखा जाए। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस थीम के तहत छह प्रमुख विषय हैं जिसके आसपास पूरा आयोजन केंद्रित होगा। ये हैं लोकतंत्र के बारे में नए सिरे से विचार, बहुपक्षीय एजेंसियों की भूमिका, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति, स्वास्थ्य व विकास को लेकर सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न चुनौतियां, पर्यावरण की चुनौतियों को पार करते हुए हरित व्यवस्था के लक्ष्य और तकनीकी के क्षेत्र में बदलती स्थिति। इस बार के आयोजन की खासियत यह है कि नई दिल्ली के साथ ही वाशिंगटन और बर्लिन में भी रायसीना डायलॉग के तहत दूसरे आयोजन होंगे। यह रायसीना डायलॉग की बढ़ती अहमियत और स्वीकृति को रेखांकित करता है। दुनिया में इस स्तर पर कूटनीति के क्षेत्र का शायद ही कोई दूसरा आयोजन होता होगा। 

कहने की जरूरत नहीं कि नई दिल्ली इन तीन दिनों तक जबरदस्त कूटनीतिक गहमा-गहमी के केंद्र में रहेगा। पिछले 24 घंटे में भारत में यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सूला लेयन, फिलीपींस के विदेश मंत्री टेडी लास्किन, अर्जेंटीना के विदेश मंत्री सेंटियागो केफिरो, नाइजीरिया के विदेश मंत्री जेफरी ओयीमा भारत पधार चुके हैं। इसके अलावा स्लोवेनिया, पुर्तगाल, पोलैंड, नीदरलैंड, मेडागास्कर, लिथुआनिया, नार्वे, लक्जमबर्ग, आर्मेनिया और गुयाना के विदेश मंत्री भी पहुंच रहे हैं।

इस तरह से रायसीना डायलॉग इन देशों के साथ भारत को ही विमर्श का मौका नहीं देगा बल्कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पहली बार यूरोपीय संघ के कई देशों के विदेश मंत्री एक साथ एक जगह पर एकत्रित होंगे। जाहिर है कि इन विदेश मंत्रियों की भारतीय विदेश मंत्री के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों में और आपस में भी होने वाली मुलाकातों में यूक्रेन-रूस के हालात पर विमर्श काफी अहम रहेगा। 

चीन के आक्रामक रवैये के बीच रायसीना डायलॉग अहम

कई जानकार रायसीना डायलॉग को हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर उभर रही चिंताओं से जोड़कर देखते हैं। असलियत में वर्ष 2016 में इसके पहले आयोजन के कुछ ही महीनों बाद पहली बार भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों के अधिकारियों की पहली बैठक हुई थी। इस बैठक ने क्वाड संगठन को मूर्त रूप दिया। बाद में चारों देशों के विदेश मंत्रियों और उसके बाद राष्ट्र प्रमुखों के बीच बैठक हुई।

वर्ष 2018 में रायसीना डायलॉग में क्वाड देशों के बीच सैन्य सहयोग प्रगाढ़ करने को लेकर काफी चर्चा हुई थी जिसकी गूंज चीन में काफी सुनाई दी थी। इस साल भी क्वाड को लेकर कई स्तरों पर चर्चा होनी है। मसलन, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के बदलते परिदृश्य में क्वाड देशों को भूमिका, वित्तीय व्यवस्था में क्वाड देशों के नियामकों के बीच भावी संपर्क और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच बेहतर आर्थिक सामंजस्य पर अलग-अलग चर्चाएं होनी हैं।

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