1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. 'युद्ध अब महीनों में नहीं, घंटों और सेकंडों में मापा जाता है', राजनाथ सिंह का बड़ा बयान

'युद्ध अब महीनों में नहीं, घंटों और सेकंडों में मापा जाता है', राजनाथ सिंह का बड़ा बयान

 Published : Sep 29, 2025 06:50 pm IST,  Updated : Sep 29, 2025 06:57 pm IST

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई राष्ट्र मिसाइलों से नहीं, बल्कि हैकिंग, साइबर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए हमारे सिस्टम को निष्क्रिय कर सकता है। हमें ऐसे खतरों से बचना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह- India TV Hindi
केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह Image Source : PTI

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि युद्ध अब ‘महीनों में नहीं, बल्कि घंटों और सेकंडों में मापा जाता है’, क्योंकि उपग्रह, ड्रोन और सेंसर संघर्ष की प्रकृति को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय तटरक्षक बल (ICG) से एक ऐसा भविष्योन्मुखी रोडमैप विकसित करने का आग्रह किया जो नई चुनौतियों का पूर्वानुमान लगा सके, अत्याधुनिक तकनीकों को एकीकृत कर सके और रणनीतियों को लगातार अनुकूलित कर सके। 

साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध का खतरा

यहां बल के मुख्यालय में आयोजित 42वें आईसीजी कमांडर सम्मेलन में अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध अब काल्पनिक खतरे नहीं हैं, बल्कि वर्तमान की हकीकत हैं। 

सिस्टम को निष्क्रिय करने की कोशिश

उन्होंने कहा, ‘कोई राष्ट्र मिसाइलों से नहीं, बल्कि हैकिंग, साइबर हमलों और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए हमारे सिस्टम को पंगु बनाने की कोशिश कर सकता है। आईसीजी को ऐसे खतरों से बचाव के लिए अपने प्रशिक्षण और उपकरणों को लगातार अनुकूलित और उन्नत करना होगा। प्रतिक्रिया समय को सेकंडों में कम करने और हर समय तत्परता सुनिश्चित करने के लिए स्वचालित निगरानी नेटवर्क और एआई-सक्षम प्रणालियां आवश्यक हैं।’ 

युद्ध अब नए सिरे से हो रहा परिभाषित- राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री ने कहा कि अब युद्ध ‘महीनों में नहीं, बल्कि घंटों और सेकंडों में मापा जाता है, क्योंकि उपग्रह, ड्रोन और सेंसर संघर्ष की प्रकृति को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं।’ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का 7,500 किलोमीटर लंबा समुद्र तट, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्रों के साथ, ‘भारी चुनौतियां’ पेश करता है, जिसके लिए उन्नत तकनीक, अच्छी तरह से प्रशिक्षित कर्मियों और चौबीसों घंटे निगरानी की आवश्यकता होती है। 

आतंकी संगठन आधुनिक उपकरण करते हैं इस्तेमाल

उन्होंने कहा कि समुद्री खतरे तेजी से तकनीक-संचालित और बहुआयामी होते जा रहे हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी चेतावनी दी कि आतंकवादी संगठन अपनी गतिविधियों की योजना बनाने के लिए डिजिटल मैपिंग और ‘रीयल-टाइम इंटेलिजेंस’ जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा, ‘पारंपरिक तरीके अब पर्याप्त नहीं हैं, हमें अपने समुद्री सुरक्षा ढांचे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग-आधारित निगरानी, ​​ड्रोन, साइबर-रक्षा प्रणालियों और स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्रों को एकीकृत करके अपराधियों और विरोधियों से आगे रहना होगा।’ 

राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है ICG

बता दें कि भारतीय तटरक्षक बल का यह सम्मेलन 28 से 30 सितंबर तक ‘विकसित होती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों’ और हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते सामरिक महत्व की पृष्ठभूमि में आयोजित किया जा रहा है। राजनाथ सिंह ने आईसीजी को राष्ट्रीय सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अपनी स्थापना के बाद से, आईसीजी ने भारतीय जल क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में शामिल 1,638 विदेशी जहाजों और 13,775 विदेशी मछुआरों को पकड़ा है। (भाषा के इनपुट के साथ)

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत