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CJP विरोध प्रदर्शन पर SC की बड़ी टिप्पणी, युवाओं को शांत करने की ज़रूरत है, संयम बरतें एजेंसियां

 Reported By: Atul Bhatia Written By: Kajal Kumari
 Published : Aug 05, 2026 01:07 pm IST,  Updated : Aug 05, 2026 02:35 pm IST

कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि युवाओं को शांत करने की जरूरत है। कानून का पालन करने वाली एजेंसियों को संयम बरतना चाहिए।

सीजेपी प्रदर्शन पर बोला सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सीजेपी प्रदर्शन पर बोला सुप्रीम कोर्ट

Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
  • छात्रों के प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट
  • एजेंसियों को दी हिदायत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में आज उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें मांग की गई थी कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में अभद्र गालियों का इस्तेमाल करने वाले युवाओं को नसीहत देने के लिए 7 दिनों की 'कम्युनिटी सर्विस' दी जाए। विरोध प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ भी कार्रवाई हो। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि युवाओं के साथ सख्ती से पेश आने के बजाए उन्हें समझना और उनसे बातचीत करना ज़रूरी है। CJI ने कहा कि अगर कुछ भटके हुए लोग पत्थरबाजी कर भी दें, तब भी युवाओं को समझाना और उनसे बातचीत करना ज़रूरी है। उन्हें सलाह और काउंसलिंग की ज़रूरत होती है।


सीजेआई ने कहा-एजेंसियां संयम बरतें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अगर सरकार बहुत सख्ती या आक्रामक रवैया अपनाएगी, तो समाज में तनाव और बढ़ सकता है, इसलिए ऐसी स्थिति से बचा जाना चाहिए। CJI ने कहा कि ज़रूरत युवाओं को सुनने और समझने की है कि वे क्यों नाराज़ हैं और क्यों नारे लगा रहे हैं। हालांकि CJI ने यह भी कहा कि आखिरकार यह फैसला कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों पर छोड़ देनी चाहिए। उन्हें इस तरह की परिस्थितियों से निपटने का अनुभव है। वे आपसे और हमसे बेहतर जानते है कि  ऐसी स्थिति को कैसे संभालना है, लेकिन उन्हें संयम बरतना चाहिए।

कोर्ट में इस मामले में क्या क्या हुआ?

  • याचिकाकर्ता मनीष कुमार सोलंकी की ओर से पेश वकील रिज़वान अहमद ने कहा, "पंद्रह दिन बीत चुके हैं... आयोजकों की जवाबदेही का क्या? वे एक चैनल से दूसरे चैनल पर जाकर भड़काऊ बयान दे रहे हैं और आग बुझाने से इनकार कर रहे हैं।"
  • वकील ने तर्क दिया कि सरकारों को प्रदर्शनकारियों की बात मानने के लिए "हद से ज़्यादा झुकना" नहीं चाहिए। एक युवा की मौत हो गई है। अगर सरकार राष्ट्रीय राजधानी से जुड़े मामले में हद से ज़्यादा झुकती है, तो क्या इससे राजस्थान में मिसाल कायम नहीं होगी? वहां भी सरकार छात्रों की बात मानने के लिए हद से ज़्यादा झुकेगी।
  • कल, अगर लखनऊ में डिग्री कॉलेज के छात्रों की कोई मांग हो और वे बसों पर पत्थर फेंकने लगें, तो क्या उत्तर प्रदेश सरकार भी हद से ज़्यादा झुकेगी?"
  • वकील ने कहा कि पत्थरबाज़ी में शामिल लोगों को सिर्फ़ इसलिए बिना किसी सज़ा के नहीं छोड़ा जाना चाहिए क्योंकि सरकार "गलत स्थिति" में थी।
  • उन्होंने कहा, "यह एक बहुत खतरनाक मिसाल है। तीन साल पहले किसान सिंघु बॉर्डर पर थे। कल 'जेनरेशन अल्फा, बीटा, डेल्टा' आएगी।
  • संसद "लोकतंत्र का मंदिर" है और कहा कि अगर 500 लोग परिसर में घुस गए थे, तो "कौन जानता है कि उनके पास देसी बंदूक थी या नहीं?"
  • उन्होंने कहा, "क्या होता अगर वे गोली चला देते? वे किसी नेशनल हाईवे पर मार्च नहीं कर रहे थे। वे रेलवे लाइन पर मार्च नहीं कर रहे थे। वे लोकतंत्र के मंदिर की ओर मार्च कर रहे थे। हर किसी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"
  • CJI ने कहा कि ध्यान शांतिपूर्ण विरोध सुनिश्चित करने पर होना चाहिए और अगर कोई घटना होती है तो संयम बरतना चाहिए।
  • उन्होंने कहा, "महत्वपूर्ण बात शांतिपूर्ण मार्च को बढ़ावा देना है। अगर कोई घटना होती है, तो पुलिस को भी बहुत संयम बरतना चाहिए ताकि स्थिति हाथ से न निकले। जहां भी ऐसी घटनाएं होती हैं, हमें उनसे बहुत सावधानी से निपटना होगा।"

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