इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की मेघायल में हनीमून के दौरान हुई हत्या के मामले में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी है। तीन हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी को सरेंडर करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ट्रायल में देरी होती है, तो 6 महीने बाद सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकती है।
किसने याचिका दाखिल की थी?
आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने कहा कि इस मामले में कुल 94 गवाह बनाए गए हैं, जिसमें से अभी तक सिर्फ 4 गवाहों के ही बयान दर्ज हुए हैं। सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और कड़ी शर्तों के साथ उसे जमानत मिली है। सोनम के वकील ने कहा कि उसने सरेंडर नहीं किया है, उसे यूपी के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था, उसकी गिरफ्तारी को सरेंडर बताया जा रहा है। सोनम के वकील ने कहा कि वो जमानत की कड़ी शर्तो का पालन कर रही है। फरार होने का कोई खतरा नहीं है।
मेघालय सरकार की तरफ से SG तुषार मेहता ने कहा कि जिस ग्राउंड ऑफ अरेस्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसका कोई आधार नहीं, क्योंकि आरोपी ने खुद सरेंडर किया था और चार्जशीट में भी ये बात दर्ज है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने क्या कहा था?
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील को दो विकल्प दिया था और पूछा था कि क्या सोनम रघुवंशी सरेंडर करेगी या कोर्ट उसकी जमानत रद्द करने पर फैसला दे। जबकि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में आरोपी सोनम रघुवंशी ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर उसे दोषी नहीं माना जा सकता है।
राज्य सरकार की ओर से SG तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि दस्तावेज में केवल एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में गलती हुई थी। इतनी छोटी तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं मिलनी चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि जमानत बरकरार रहने की सूरत में सोनम के फरार होने की आशंका है।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सोनम की जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बदलते समाज में ये चीजें होना लाजमी है। आज की पीढ़ी हमसे ज्यादा जानकार हो सकती है, लेकिन प्रेशर से निपटने के मामले में वे ज्यादा कमजोर हैं। SG मेहता ने कहा कि उनके पास जानकारी ज्यादा है, ज्ञान नहीं। जस्टिस वराले ने कहा कि WhatsApp पर जो कुछ भी शेयर किया जा रहा है, उसे ज्ञान माना जा रहा है।
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