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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश, सोशल मीडिया कंटेंट नियंत्रण के लिए NBSA से करें परामर्श

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Aug 26, 2025 09:55 am IST,  Updated : Aug 26, 2025 10:31 am IST

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया कि ऐसे दिशानिर्देश एनबीएसए के परामर्श से तैयार किए जाएंगे। सभी हितधारकों के सुझावों और विचारों को ध्यान में रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सोशल मीडिया पर प्रसारित कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए अपने प्रस्तावित दिशानिर्देश, जिसमें विभिन्न प्रकार की सामग्री भी शामिल हैं, इस पर रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि ये दिशानिर्देश समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण (NBSA) के परामर्श से तैयार किए जाएं। सरकार को नवंबर में मामले की अगली सुनवाई तक का समय दिया गया है।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यवसायीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि सोशल मीडिया पर प्रभावशाली लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यवसायीकरण करते हैं। उनकी टिप्पणियों से विविध समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचने की संभावना रहती है, जिसमें दिव्यांग, महिलाएं, बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और अल्पसंख्यक शामिल हैं। 

दिशानिर्देशों पर किया जाए काम

सुप्रीम कोर्ट के जज सूर्यकांत और जज जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह पॉडकास्ट जैसे ऑनलाइन शो सहित सोशल मीडिया पर आचरण को विनियमित करने के लिए राष्ट्रीय प्रसारकों और डिजिटल एसोसिएशन के परामर्श से दिशानिर्देशों पर काम करें, जिसका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता निशा भंभानी कर रही हैं, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विभिन्न समुदायों के समाज में सम्मान के साथ रहने के समान रूप से महत्वपूर्ण अधिकार के बीच संतुलन बनाया जा सके।

समय रैना मामले पर कोर्ट में हुई सुनवाई

कोर्ट सोमवार को समय रैना सहित सोशल मीडिया हास्य कलाकारों के खिलाफ विकलांग व्यक्तियों के बारे में असंवेदनशील चुटकुले बनाकर 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग' करने के मामले की सुनवाई कर रही थी।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यवसायीकरण 

जज बागची ने कहा, 'जब आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का व्यवसायीकरण कर रहे हैं, तो आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि समाज के कुछ वर्गों की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।' जज कांत ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के बारे में असंवेदनशील चुटकुले बनाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने का संवैधानिक उद्देश्य पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है।

संवेदनशीलता का नहीं होना चाहिए हनन- जज बागची

जज बागची ने माना कि हास्य जीवन का एक अभिन्न अंग है, लेकिन हल्केपन से संवेदनशीलता का हनन नहीं होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया, 'हम विविध समुदायों का देश हैं।' जज कांत ने कहा कि दिशा-निर्देश इस प्रकार तैयार किए जाने चाहिए कि उल्लंघन के निश्चित रूप से विशिष्ट परिणाम सामने आएं।

जब तक प्रभावी परिणाम तय नहीं किए जाते...

जज कांत ने कहा, 'जब तक प्रभावी परिणाम तय नहीं किए जाते, लोग जिम्मेदारी से बच निकलने के लिए इधर-उधर भटक सकते हैं। परिणाम नुकसान के अनुपात में होने चाहिए। वे सिर्फ़ औपचारिकता नहीं हो सकते।' जज ने स्पष्ट किया कि कोर्ट एक क्षण के लिए भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास नहीं कर रहा है, बल्कि वह प्रस्तावित दिशानिर्देशों से यह अपेक्षा कर रहा है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आहत करने वाले भाषण के बीच एक रेखा खींचेंगे।

सोशल मीडिया यूजर्स को संवेदनशील बनाना होगा

केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने जवाब दिया कि प्रस्तावित दिशानिर्देशों का प्राथमिक उद्देश्य सोशल मीडिया यूजर्स को संवेदनशील बनाना होगा। लेकिन यदि कोई उल्लंघन करता है, तो उसे जिम्मेदारी लेनी होगी। इनमें से कई मीडिया ब्लॉग आपके अपने अहंकार को पोषित करने जैसे हैं।

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