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दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ क्राइम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पुलिस को गश्त बढ़ाने और संवेदनशील जगहों पर निगरानी के आदेश

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Oct 08, 2026 01:48 pm IST,  Updated : Oct 08, 2026 01:54 pm IST

दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ है। कोर्ट ने यात्रियों की शिकायतों के लिए दिल्ली पुलिस से अलग शिकायत व्यवस्था बनाने को भी कहा है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : PTI

दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 5 अक्टूबर के अपने आदेश में कोर्ट ने दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस को ज्यादा गश्त करने और उन जगहों पर खास नजर रखने को कहा है, जहां महिलाओं और लड़कियों के साथ छेड़छाड़ या अपराध का खतरा ज्यादा है।

स्कूल-कॉलेज और कोचिंग सेंटरों पर खास नजर

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कोचिंग सेंटरों के आसपास पुलिस की गश्त बढ़ाने का निर्देश दिया है। पुलिस को ऐसे इलाकों की पहचान कर वहां नियमित और अचानक जांच करने को कहा गया है, जहां अपराध का खतरा ज्यादा है।

बस, कैब और ऑटो चालकों की होगी जांच

कोर्ट ने सार्वजनिक वाहनों में सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए बस, कैब, टैक्सी और ऑटो चालकों की जांच के निर्देश दिए हैं। यह नियम Ola, Uber और Rapido जैसी ऐप आधारित सेवाओं पर भी लागू होगा। अब केवल जांच और रिकॉर्ड के बाद ही ड्राइवर और सहायक वाहन चला सकेंगे। वाहन के अंदर ड्राइवर और सहायक का नाम और फोटो साफ तौर पर दिखाना होगा। ड्राइवरों के लिए यूनिफॉर्म या ऐसा पहचान पत्र रखना भी जरूरी होगा, जिससे यात्री उन्हें आसानी से पहचान सकें।

बिना जांच किसी दूसरे ड्राइवर को वाहन देने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वाहन किसी दूसरे व्यक्ति को तभी दिया जा सकता है, जब उसकी पहले जांच हो चुकी हो। बिना जांच के किसी ड्राइवर को वाहन देना या वाहन किसी और को चलाने के लिए देना गलत माना जाएगा। पुलिस और परिवहन विभाग को चेक प्वाइंट बनाकर समय-समय पर और अचानक ड्राइवरों और वाहनों की जांच करने को कहा गया है। नियम तोड़ने पर ड्राइवर या सहायक को सस्पेंड या नौकरी से हटाया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर वाहन भी तुरंत जब्त किया जा सकता है।

सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर भी कार्रवाई

कोर्ट ने यात्रियों की शिकायतों के लिए अलग शिकायत व्यवस्था बनाने को भी कहा है, ताकि किसी ड्राइवर या वाहन से जुड़ी परेशानी की शिकायत तुरंत की जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ट्रकों और भारी वाहनों की पहचान करने को कहा है, जो सड़क पर खड़े होकर लोगों की नजर रोकते हैं और अंधा मोड़ या ब्लाइंड स्पॉट बनाते हैं। ऐसे वाहनों को हटाया जाएगा।

ऐसे वाहनों पर भी कार्रवाई होगी, जिनमें बिना अनुमति लोग बैठे या ठहरे हुए पाए जाते हैं।

बिना अनुमति शराब की दुकान और अवैध शराब पर भी कार्रवाई

कोर्ट ने बिना जरूरी अनुमति चल रही शराब की दुकानों और ऐसे खाने-पीने के ठिकानों की पहचान करने को कहा है, जहां गैरकानूनी तरीके से शराब दी जा रही है। पुलिस के बीट अधिकारी ऐसे इलाकों पर नजर रखेंगे। शराब की दुकानों के आसपास लोगों की भीड़ या बेवजह खड़े रहने वालों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इसका मकसद महिलाओं को छेड़छाड़ से बचाना और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित माहौल बनाना है।

दिल्ली के मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर की होगी जवाबदेही

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को इन निर्देशों को लागू कराने की जिम्मेदारी दी है। दोनों अधिकारियों को कोर्ट के सामने हलफनामा देकर बताना होगा कि आदेश पर क्या-क्या कदम उठाए गए। मुख्य सचिव दिल्ली प्रशासन की ओर से और पुलिस कमिश्नर दिल्ली पुलिस की ओर से हलफनामा दाखिल करेंगे। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर उसके निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत तौर पर जवाब देना होगा। यानी आदेश लागू कराने में लापरवाही होने पर दोनों अधिकारियों की सीधे जवाबदेही तय की जा सकती है।

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