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चतरा प्लेन क्रैश ने 10 साल पहले नजफगढ़ घटना की याद दिला दी, तब एयर एम्बुलेंस विमान के दोनों इंजन हुए थे फेल, जानें फिर क्या हुआ

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Feb 24, 2026 05:13 pm IST,  Updated : Feb 24, 2026 05:13 pm IST

चतरा प्लेन क्रैश ने 10 साल पहले दिल्ली के नजफगढ़ में हुई घटना की याद दिला दी। 2016 में एक एयर एंबुलेंस विमान मरीज को लेकर दिल्ली आ रहा था लेकिन लैंडिंग से पहले उसके दोनों इंजन फेल हो गए थे।

Jharkhand- India TV Hindi
चतरा प्लेन क्रैश ने 10 साल पहले नजफगढ़ घटना की याद दिलाई Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली: झारखंड के चतरा में हुए प्लेन क्रैश में 2 क्रू मेंबर और 5 पैसेंजर समेत सभी 7 लोगों की मौत हो गई है। ये चार्टर प्लेन एक एयर एंबुलेंस था, जिसमें बर्न इंजरी के एक मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था। लेकिन रास्ते में ही प्लेन क्रैश हुआ और सभी काल के गाल में समा गए। इस घटना ने साल 2016 की दिल्ली के नजफगढ़ की घटना की याद दिला दी है। 

साल 2016 में क्या हुआ हुआ था?

साल 2016 में भी एक एयर एंबुलेंस प्लेन पटना से दिल्ली आ रहा था। विमान में एक डॉक्टर, एक तकनीशियन, वीरेंद्र राय नाम के एक हृदय रोगी और चालक दल सहित 7 लोग सवार थे। रनवे के पास पहुंचते समय विमान के दोनों इंजन एक के बाद एक फेल हो गए थे इसके बाद पायलट ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ जिले के कैर गांव में एक खुले मैदान में आपातकालीन लैंडिंग करने का फैसला किया। हालांकि उनकी सूझबूझ ने संभवतः एक बड़े हादसे को टाल दिया। इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई थी बल्कि दो लोग घायल हुए थे।

चतरा प्लेन हादसे में किसकी-किसकी मौत हुई?

रेडबर्ड एविएशन का एक एयर एम्बुलेंस विमान, बीचक्राफ्ट किंग एयर BE9L, रांची से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद झारखंड के चतरा जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, विमान ने शाम 7:11 बजे उड़ान भरी और शाम 7:34 बजे कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क स्थापित किया।

खराब मौसम के कारण पायलटों ने मार्ग बदलने का अनुरोध किया। कुछ ही मिनटों बाद, वाराणसी से लगभग 100 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में संचार और रडार संपर्क टूट गया। अधिकारियों ने बताया कि विमान घने जंगल में गिरने से पहले संभवतः तूफान की चपेट में आ गया था।

दुर्घटनास्थल चतरा जिले के घने जंगल में स्थित था। बचाव दल को शवों को लगभग दो किलोमीटर तक ले जाना पड़ा। जब बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे, तब तक कोई भी जीवित नहीं बचा था।

विमान में सात लोग सवार थे, जिनमें दो चालक दल के सदस्य और एक मरीज और उसके परिवार के सदस्यों सहित पांच अन्य लोग शामिल थे। मरीज संजय लातेहार जिले के चंदवा का निवासी था। होटल में शॉर्ट सर्किट दुर्घटना में वह बुरी तरह जल गया था। साधारण पृष्ठभूमि वाले उसके परिवार ने दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में इलाज के लिए उसे एयर एम्बुलेंस से ले जाने के लिए पैसे उधार लिए थे।

मृतकों में उनकी पत्नी अर्चना, रिश्तेदार ध्रुव, अस्पताल के कर्मचारी और विमान चालक दल शामिल थे। विमान दुर्घटना जांच शाखा अब दुर्घटना की जांच कर रही है और विमान संचालक के सुरक्षा रिकॉर्ड की छानबीन कर रही है।

2016 और 2026 की दुर्घटनाओं में चौंकाने वाली समानताएं

  • दोनों ही एयर एम्बुलेंस थीं।
  • दोनों में सात लोग सवार थे।
  • दोनों ही बीचक्राफ्ट किंग एयर विमान थे।
  • दोनों ही तत्काल चिकित्सा उपचार के लिए रोगियों को ले जा रहे थे।
  • दोनों में ही हवा में गंभीर तकनीकी या मौसम संबंधी आपात स्थिति उत्पन्न हुई।
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