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क्या काशीपुर में था गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम? ASI ने फिर शुरू की खुदाई

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Oct 26, 2026 03:10 pm IST,  Updated : Oct 26, 2026 03:20 pm IST

उत्तराखंड के काशीपुर स्थित द्रोणासागर में Archaeological Survey of India ने एक बार फिर खुदाई शुरू की है। इस अभियान का मकसद उस मान्यता की ऐतिहासिक पड़ताल करना है, जिसके अनुसार यहां महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम था।

Kashipur, ASI- India TV Hindi
द्रोणसागर में एएसआई की खुदाई Image Source : ANI/ INDIA TV

काशीपुर: क्या उत्तराखंड के काशीपुर में गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम था? इसी प्रमाणिकता की जांच करने के लिए काशीपुर के द्रोणासागर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक बार फिर खुदाई का काम शुरू किया है। इस खुदाई का उद्देश्य इस स्थल से जुड़ी उन स्थानीय मान्यताओं की ऐतिहासिक प्रमाणिकता की जांच करना है। बताया जाता है कि  महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम था। पुरातत्वविदों को उम्मीद है कि व्यवस्थित खुदाई से इस प्राचीन स्थल के इतिहास और सांस्कृतिक क्रम को समझने में मदद मिलेगी।

पहले भी कई बार की जा चुकी है खुदाई 

ASI के देहरादून सर्किल के प्रभारी Superintending Archaeologist मोहन चंद्र जोशी ने बताया कि द्रोणासागर एक प्राचीन पुरातात्विक स्थल है। यहां इससे पहले भी कई बार खुदाई की जा चुकी है। वर्ष 1965 में Archaeologist वाईडी शर्मा ने औपचारिक खुदाई की थी, जबकि 1970-71 में भी यहां उत्खनन किया गया था। इन अभियानों के दौरान विभिन्न संरचनाएं मिली थीं। जोशी के मुताबिक, इस स्थल का इतिहास लगभग 2,000 वर्षों तक फैला हुआ है। यहां चित्रित धूसर मृदभांड (Painted Grey Ware-PGW) के साक्ष्य भी सामने आए हैं। इनके आधार पर कुछ विद्वान इस स्थल को महाभारत काल से जोड़ते हैं।

खुदाई में मिलीं प्राचीन संरचनाएं

जोशी ने बताया कि फिलहाल पिछले 20 से 25 दिनों से खुदाई का काम चल रहा है। बारिश के कारण खुदाई में कुछ रुकावटें भी आई हैं। शुरुआती निष्कर्षों में शुंग-कुषाण काल का एक छोटा ईंट का टुकड़ा मिला है। इसके अलावा, ऊपरी स्तर पर ईंटों से बनी एक गोलाकार संरचना भी मिली है, जिसे फिलहाल संभावित कुएं के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संरचना के बारे में पुख्ता जानकारी तभी मिल सकेगी, जब इसकी पूरी तरह खुदाई कर इसे सामने लाया जाएगा।

प्राचीन स्थल का इतिहास जानने की कोशिश

ASI का लक्ष्य प्राकृतिक मिट्टी की परत तक व्यवस्थित खुदाई करना है, ताकि स्थल का पूरा सांस्कृतिक क्रम और उसकी उत्पत्ति समझी जा सके। पुरातत्वविद यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि गोलाकार संरचना की नींव किस स्तर पर है और क्या अलग-अलग कालखंडों में यहां ईंटों से निर्माण किया गया था। फिलहाल खुदाई जारी है। हालांकि, अब तक मिले साक्ष्य इस स्थल के प्राचीन इतिहास की पड़ताल में मददगार हैं, लेकिन इनके आधार पर महाभारत काल से इसके संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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