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किस्सा: जब लंदन में सावरकर ने गांधी को खाने पर बुलाया लेकिन उन्हें भूखा रहना पड़ा, नॉनवेज ना खाने पर हुआ था मजाक

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Feb 26, 2026 06:00 am IST,  Updated : Feb 26, 2026 06:00 am IST

लंदन में महात्मा गांधी, सावरकर के कमरे पर मेहमान थे। इस दौरान सावरकर ने खाने में नॉनवेज पकाया था। जब उन्होंने इस खाने को गांधी से खाने के लिए पूछा तो गांधी ने साफ मना कर दिया। गांधी ने कहा कि वो नॉनवेज नहीं खाते हैं। इस बात को लेकर सावरकर ने गांधी का मजाक भी उड़ाया था।

Vinayak Damodar Savarkar- India TV Hindi
लंदन में सावरकर के मेहमान थे गांधी Image Source : SAVARKAR-X@GIRISHVHP, GANDHI- X@JPNADDA

नई दिल्ली: देश के स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) की आज पुण्यतिथि है। 26 फरवरी 1966 को उनका निधन हो गया था। उनका जन्म 28 मई, 1883 को नासिक, महाराष्ट्र में हुआ था और वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, वकील, लेखक और समाज सुधारक थे। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर हम उनसे जुड़ा एक किस्सा आपसे साझा कर रहे हैं।

क्या है गांधीजी को दावत देने वाली कहानी?

ये कहानी लंदन में साल 1906 की है। वो एक ठंडी शाम थी, जब विनायक दामोदर सावरकर नॉनवेज पका रहे थे। उस दिन सावरकर के घर में मेहमान आने वाले थे और उन मेहमान का नाम था मोहनदास करमचंद गांधी यानी महात्मा गांधी। जब ये मुलाकात हुई तो गांधी अपने मुद्दे पर सावरकर से बात करने की कोशिश करने लगे। दरअसल गांधी दक्षिण अफ़्रीका में रह रहे भारतीयों के साथ हो रहे अन्याय का मुद्दा दुनिया में उठाना चाहते थे और उसके लिए रणनीति बनाना चाहते थे। लेकिन इससे पहले कि इस मुद्दे पर बात शुरू होती, सावरकर ने उनसे कहा कि पहले खाना खा लीजिए।

ये उस दौर की बात है, जब गांधी महात्मा नहीं बने थे और ना ही भारत में सक्रिय रूप से काम कर रहे थे। गांधी को जब पता लगा कि सावरकर ने खाने में नॉनवेज बनाया है तो गांधी ने उसे खाने से साफ मना कर दिया। गांधी ने कहा कि वह गोश्त या मछली नहीं खाते हैं। सावरकार को जब ये पता लगा कि गांधी नॉनवेज नहीं खाते तो उन्होंने गांधी से मजाक भी किया।

सावरकर ने मजाक में गांधी से कहा कि कोई इंसान बिना नॉनवेज खाए अंग्रेजों को चुनौती कैसे दे सकता है? हालांकि गांधी ने उस दिन वो नॉनवेज खाना नहीं खाया और सावरकर के घर से भूखे पेट ही विदा हुए। इस कहानी का जिक्र The RSS: Icons of the Indian Right नाम की किताब में किया गया है, जिसे नीलांजन मुखोपाध्याय ने लिखा है।

महात्मा गांधी की हत्या मामले में गिरफ्तार भी हुए थे सावरकर 

साल 1948 में जब महात्मा गांधी की हत्या हुई तो उसके बाद सावरकर को भी गिरफ्तार किया गया था। उन पर हत्या के षड़यंत्र में शामिल होने के आरोप में ये कार्रवाई की गई थी। हालांकि फरवरी 1949 में उन्हें बरी कर दिया गया था।

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