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‘ADHM’ विवाद: शिवसेना ने कहा, फडणवीस ने 56 इंच का सीना दिखाने का मौका गंवा दिया

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 24, 2016 08:56 pm IST,  Updated : Oct 24, 2016 08:56 pm IST

मुंबई: पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान अभिनीत फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की रिलीज का मार्ग प्रशस्त करने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की भूमिका को लेकर उन पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने आज

uddhav thackeary- India TV Hindi
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मुंबई: पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान अभिनीत फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ की रिलीज का मार्ग प्रशस्त करने में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की भूमिका को लेकर उन पर निशाना साधते हुए शिवसेना ने आज कहा कि फडणवीस ने यह दिखाने का मौका गंवा दिया कि यहां 56 इंच के सीने वाली सरकार है।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक संपादकीय में कहा है इस फिल्म की रिलीज को लेकर घटित घटनाक्रम भयावह, निर्मम रहे और इन घटनाक्रमों ने शहीद जवानों के घावों पर नमक रगड़ने जैसा काम किया है।

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इस फिल्म के निर्माताओं और मनसे के बीच संधि कराने के लिए फडणवीस को विपक्षी कांग्रेस और राकांपा की ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इनका आरोप है कि ऐसा करके फडणवीस ने कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने की अपनी मुख्य जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।

सामना के संपादकीय में कहा गया है, पर्दे के पीछे काफी कुछ हुआ और इस फिल्म को लेकर सभी विरोध वर्षा (मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास) में चाय-नाश्ते के साथ खत्म हो गया। हम इसमें नहीं जाना चाहते कि कौन जीता और कौन हारा, लेकिन संपूर्ण घटना से हमारे शहीद जवानों का अपमान हुआ है।

इसमें कहा गया है, (भाजपा) केन्द्रीय नेता पाकिस्तान को धमका रहे हैं और लक्षित हमलों पर वाहवाही लूट रहे हैं। लेकिन इनमें से एक भी नेता के पास यह कहने का साहस नहीं है कि पाकिस्तानी कलाकारों वाली फिल्मों को रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लक्षित हमलों के बाद पाकिस्तान करीब 25 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर चुका है और किसी को इसकी परवाह नहीं है।

शिवसेना ने कहा कि फडणवीस के पास यह दिखाने का मौका था कि 56 इंच का सीना वाली सरकार है और पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकार की तुलना में उसकी रीढ़ कहीं अधिक मजबूत है। संपादकीय में कहा गया है, वर्षा में चाय सत्र के बाद कइयों के चेहरे से नकाब हट गए। करण जौहर को अपनी फिल्म की रिलीज के बदले सेना कल्याण कोष में 5 करोड़ रुपये डालने को कहा गया था। क्या हमारे जवानों के बलिदान की यही कीमत है। यह संपूर्ण घटना भयावह, निर्मम है और इसने शहीदों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।

इस फिल्म को लेकर जारी गतिरोध दूर करने में अपने हस्तक्षेप को उचित ठहराते हुए फडणवीस ने कहा था कि यह मुद्दा इसलिए हल हो सका क्योंकि प्रोड्यूसर्स गिल्ड और मनसे का एक ही रुख था और वह था भारतीय सेना के साथ एकजुटता दिखाना।

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