मुंबई: शिवसेना ने आज कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को जीत इसलिए मिली क्योंकि चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किसानों को कर्ज माफी का लालच दिया गया। पार्टी ने यह भी कहा कि नोटबंदी पर यह जनादेश नहीं मिला है। केंद्र और महाराष्ट्र की सत्ता में साझेदार भाजपा और शिवसेना ने राज्य में हाल ही में हुए निकाय चुनाव अलग-अलग लड़े थे। दोनों पार्टियों के बीच के रिश्तों में तनाव है और शिवसेना अक्सर भाजपा एवं मोदी की आलोचना करती है।
शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे एक संपादकीय में कहा गया, उत्तर प्रदेश का जनादेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चुनाव प्रचार के दौरान किसानों से किए गए कर्ज माफी के वादे के कारण है। नोटबंदी के फैसले के कारण यह नहीं हुआ है।
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संपादकीय में कहा गया, उत्तर प्रदेश में प्रचार से भाजपा को पड़ोसी उत्तराखंड में फायदा हुआ। बहरहाल, पंजाब में भाजपा और अकालियों को धूल चाटनी पड़ी। वह गोवा में 15 सीट भी नहीं जीत सकी, जबकि उसके पास मनोहर पर्रिकर जैसा नेता है।
शिवसेना ने कहा, मणिपुर ने भी भाजपा को बड़ा जनादेश नहीं दिया। जब उत्तर प्रदेश चुनावों पर चर्चा की जा रही है तो इन राज्यों में पार्टी के लिए हुई वोटिंग पर भी बराबर विचार किया जाना चाहिए। संपादकीय में अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया गया कि क्या भाजपा इसका निर्माण-कार्य शुरू करेगी।
शिवसेना ने कहा कि श्मशान-कब्रिस्तान जैसे बयान देकर मोदी वोटों के ध्रुवीकरण में सफल हुए और उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव में हिंदुत्व कार्ड खेला। पार्टी ने कहा, बेहतर होता कि मोदी ने प्रचार के दौरान समान नागरिक संहिता और राम मंदिर का मुद्दा उठाया होता। संपादकीय में कहा गया कि बिहार में नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व की तुलना में अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बचकाने नेतृत्व को उत्तर प्रदेश के लोगों ने खारिज कर दिया।
पार्टी ने कहा, यादवों और दलितों ने अखिलेश यादव को सबक सिखाने के लिए भाजपा को वोट दिया। मोदी और अमित शाह ने सोशल इंजीनियरिंग के गणित का अच्छा इस्तेमाल किया और इससे पार्टी को उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने में मदद मिली।