नई दिल्ली: लंबे समय से अटके पड़े वस्तु एवं सेवाकर (GST) विधेयक पर केन्द्र और राज्यों के बीच आज महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात आगे बढ़ी है। दोनों पक्षों में इस सिद्धांत पर सहमति बनी है कि GST दर मौजूदा स्तर से कम रहनी चाहिये और मोटे तौर पर यह सहमति भी उभरी है कि GST दर का उल्लेख संविधान संशोधन विधेयक में नहीं किया जायेगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली के आह्वान पर बुलाई गई राज्यों के वित्त मंत्रियों की प्राधिकृत समिति की आज हुई बैठक में यह सहमति बनी है। इस बात पर भी सहमति बनी है कि GST लागू होने के पहले पांच साल के दौरान राज्यों को राजस्व नुकसान होने की स्थिति में उसकी भरपाई की प्रणाली की भी व्यवस्था की जानी चाहिये।
उल्लेखनीय है कि GST के लागू होने पर केन्द्र और राज्यों में लगने वाले अप्रत्यक्ष करों को इसमें समाहित कर लिया जायेगा। राज्यों के वित्त मंत्रियों की प्राधिकृत समिति के चेयरमैन और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने बैठक के बाद कहा कि इस बारे में व्यापक सहमति बनी है कि साधारण व्यवसायी और आम करदाता को GST की शुरआत से फायदा होना चाहिये और इसके लिये कर की दर कम रहनी चाहिये। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जायेगा कि राज्यों को इससे राजस्व का नुकसान नहीं होना चाहिये।