नयी दिल्ली: विपक्षी नेताओं ने यह कहते हुए धर्मनिरपेक्ष ताकतों के बीच एकता पर जोर दिया कि सत्ताधारी भाजपा को रोकने के लिए यह देश की जरूरत है। नेताओं ने राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय स्तर पर साथ आने की वकालत करते हुए आगामी राष्ट्रपति चुनाव को ऐसे एक गठबंधन की पहली अग्नि परीक्षा बताया। (पाकिस्तान से शहीदों का बदला लेने के लिए भारतीय सेना को मिली खुली छूट)
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने पार्टियों को यह सुनिश्चित करने के लिए आगाह किया कि महागठबंधन मोदी बनाम सभी की लड़ाई न बन जाए जैसा कि 1971 के आम चुनाव में हुआ था जब एकीकृत विपक्ष ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुकाबला किया था। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह दिवंगत मधु लिमये की 95वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने संविधान का धर्मनिरपेक्ष पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ऐसा एक गठबंधन बनाने का आह्वान किया। वरिष्ठ जदयू नेता शरद यादव ने ऐसे ही विचार व्यक्त किये और कहा कि देश बचाने के लिए नेताओं को हाथ मिलाना होगा। भाकपा नेता अतुल कुमार अंजान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वह राष्ट्रपति चुनाव में आम सहमति वाला उम्मीदवार उतारें।
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