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कांग्रेस के मुखपत्र में अपने ही नेताओं की आलोचना

 Written By: India TV News Desk
 Published : Dec 28, 2015 11:04 am IST,  Updated : Dec 28, 2015 11:04 am IST

मुंबई कांग्रेस के मुखपत्र के दिसंबर एडिशन में नेहरू की कश्मीर, चीन और तिब्बत पर लिए गए फैसलों पर सवाल खड़े किए गए हैं और नेहरू को कश्मीर विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

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sonia gandhi

नई दिल्ली: आज कांग्रेस का 131वां स्थापना दिवस है और पार्टी के मुखपत्र 'कांग्रेस दर्शन' में छपे लेख में अपने ही नेताओं की आलोचना की गई है। दरअसल मुंबई कांग्रेस के मुखपत्र के दिसंबर एडिशन में नेहरू की कश्मीर, चीन और तिब्बत पर लिए गए फैसलों पर सवाल खड़े किए गए हैं और नेहरू को कश्मीर विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए उनके पिता पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। इस एडिशन को 15 दिसंबर को पटेल की जयंती पर विशेष तौर पर छापा गया है। 28 दिसंबर 1885 को कांग्रेस की स्थापना हुई थी।

हालांकि मुखपत्र के संपादक और कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने पूरे विवाद से किनारा करते हुए इसे संपादकीय भूल बताया है लेकिन मुखपत्र में छपे लेख से नाराज कांग्रेस हाई कमान के जनरल सेक्रेटरी मोहन प्रकाश ने मुंबई कांग्रेस से सफाई मांगी है।

कांग्रेस के मुखपत्र में यह भी कहा गया है कि, अगर नेहरू सरदार पटेल की बात मान लेते तो गोवा 1950 में ही हिन्दुस्तान में शामिल हो जाता। कांग्रेस दर्शन में सोमनाथ मंदिर को लेकर नेहरू के विरोध का भी जिक्र किया गया है और ये भी कहा गया है कि महात्मा गांधी सरदार पटेल के मुरीद थे।

'नेहरू की कश्मीर नीति ग़लत'

अगर सरदार पटेल के कहने पर चलते तो कश्मीर, चीन, तिब्बत और नेपाल के हालात आज जैसे नहीं होते। कश्मीर के मुद्दे को पंडित नेहरू ने अपने अधिकार में ले रखा था। लेकिन ये सच है कि सरदार पटेल कश्मीर में जनमत संग्रह और कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने से बेहद नाराज थे।

'नेहरू की वजह से चीन समस्या'

विदेश विभाग पंडित नेहरू का कार्यक्षेत्र था। लेकिन डिप्टी पीएम होने की वजह से कैबिनेट की विदेश विभाग समिति में सरदार पटेल का जाना होता था। सरदार पटेल की दूरदर्शिता का लाभ यदि उस समय लिया जाता तो अनेक वर्तमान समस्याओं का जन्म नहीं होता। 1950 में पंडित नेहरू को लिखे एक पत्र में पटेल ने चीन और उसकी तिब्बत को लेकर नीति से सावधान किया था और चीन का रवैया विश्वासघाती बताया था। पत्र में कहा था कि तिब्बत पर चीन का कब्जा नई समस्याओं को जन्म देगा। 1950 में नेपाल को लेकर भी लिखे पत्रों से भी पंडित नेहरू सहमत नहीं थे।

'1950 में ही गोवा मिल जाता..'

1950 में ही गोवा की स्वतंत्रता को लेकर चली दो घंटे की कैबिनेट बैठक में लंबी बातचीत के बाद सरदार पटेल ने केवल इतना कहा -  'क्या हम गोवा जाएंगे, केवल दो घंटे की बात है'। नेहरू इससे बेहद नाराज हुए थे। अगर पटेल की बात मान ली गई होती, तो 1961 तक गोवा की स्वतंत्रता की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती।

'पटेल की वजह से रियासतें मिलीं'

13 नवंबर को सरदार पटेल ने सोमनाथ के मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, जो पंडित नेहरू के कड़े विरोध के बाद भी बना। सरदार पटेल ने 562 रियासतों का एकीकरण किया, जो विश्व इतिहास में एक आश्चर्य था। महात्मा गांधी ने सरदार पटेल के बारे में लिखा था - 'रियासतों की समस्या जटिल थी, जिसे केवल तुम ही हल कर सकते थे'।

'62 दिनों में अध्यक्ष बनीं सोनिया'

सोनिया गांधी का लक्ष्य एयर होस्टेस बनना था और उनके पिता पर ये आरोप है कि वो फासिस्ट फोर्स से जुड़े हुए थे। सोनिया गांधी 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्य बनीं और महज 62 दिनों में ही पार्टी की अध्यक्ष बन गईं। उन्होंने सरकार बनाने के लिए कोशिश भी की जिसमें वो सफल नहीं हुईं।

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