पणजी: कांग्रेस के पूर्व विधायक विश्वजीत राणे आज औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गये। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के शक्ति परीक्षण के दौरान राणे ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया था। पर्रिकर के शक्ति परीक्षण के दौरान सदन से अनुपस्थित रहने के बाद उत्तर गोवा के वालपोई से विधायक चुने गए राणे ने कांग्रेस से और सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। राणे ने उस दौरान कहा था कि वह 40 सदस्यीय सदन में अधिकतम 17 सीटें मिलने के बावजूद सरकार बनाने में कांग्रेस की असफलता के विरोध में इस्तीफा दे रहे हैं।
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शक्ति परीक्षण के दौरान अंतत: महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के तीन, गोवा फॉरवार्ड पार्टी (जीएफपी) के तीन, तीन निर्दलीय विधायकों तथा भाजपा के 12 विधायकों के वोट से पर्रिकर ने बहुमत साबित कर दिया था। इस दौरान विपक्ष में कांग्रेस के 16 विधायकों ने वोट दिया था।
पणजी में भाजपा मुख्यालय पर आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रतापसिंह राणे के पुत्र राणे (46) मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर और गोवा भाजपा अध्यक्ष विनय तेंदुलकर की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हुए। इस दौरान वालपोई से सैकड़ों की संख्या में राणे के समर्थक वहां मौजूद थे।
राणे का पार्टी में स्वागत करते हुए पर्रिकर ने कहा, कांग्रेस पार्टी के भीतर लगातार चल रही अंदरूनी लड़ाई और बेचैनी के कारण राणे से उसे छोड़ा है। अंदरूनी झगड़े के कारण कांग्रेस के और भी कई नेता भाजपा में आना चाहते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री ने, राणे को भविष्य में कोई महत्वपूर्ण पद दिए जाने या उन्हें मंत्री पद देने पर कुछ नहीं बोला।
गौरतलब है कि भाजपा की गोवा विधायक दल ने हाल ही में उन्हें कैबिनेट में शामिल करने की बात कही थी। राणे ने कहा, मैं पार्टी को मजबूत बनाने का काम करूंगा। मैं यहां अस्थाई रूप से नहीं आया हूं। मैं यहां रूकने वाला हूं और पार्टी के लिए काम करने वाला हूं। उन्होंने कहा, मैंने अपने पिता से आशीर्वाद लिया है।
वहीं आज दिन में राणे का समर्थन करते हुए लक्ष्मी हलवालकर के नेतृत्व में सभी वालपोई ब्लॉक कांग्रेस समिति सदस्यों ने कल देर रात पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा पत्र में कहा गया, हम, वालपोई ब्लॉक कांग्रेस समिति के सदस्य तत्काल प्रभाव से कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देते हैं क्योंकि हमें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के नेतृत्व पर भरोसा नहीं है।