देहरादून: सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 10 मई को उत्तराखंड विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण से पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज केंद्रीय एजेंसियों के दुरूपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के विधायकों से लेकर राजनीतिक नेताओं तक को धमकाया जा रहा है और उनके फोन टैप किये जा रहे हैं। रावत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब एक निजी टेलीविजन चैनल ने एक स्टिंग जारी कर कथित रूप से बागी कांग्रेस विधायक हरक सिंह रावत तथा एक अन्य कांग्रेस विधायक मदन सिंह बिष्ट की बातचीत रिकॉर्ड की है जिसमें कहा जा रहा है कि रावत किस प्रकार से खनन से जुटाये पैसे का दुरूपयोग करते हुए विधायकों को अपने पक्ष में रहने का प्रलोभन दे रहे हैं।
हालांकि, संवाददाताओं द्वारा इस बाबत पूछे जाने पर रावत ने फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया। रावत ने कहा कि उत्तराखंड में केंद्रीय एजेंसियों का खुलकर दुरपयोग किया जा रहा है और उनकी पार्टी के विधायकों को ही नहीं बल्कि राजनीतिक नेताओं को भी धमकाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा, हमारे विधायकों को धमकाने के लिये कोई रिश्तेदार के वेश में आ रहा है, कोई शुभचिंतक के रूप में और कोई जान-पहचान वाले के तौर पर मिलने आ रहा है और उनके जरिये हमारे विधायकों को राजनीतिक नेताओं तक धमकी भरे संदेश भेजे जा रहे हैं। रावत ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि खुद उनके उपर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है मानो वह कोई देशद्रोही हों।
उन्होंने अपने अलावा अपने निकट सहयोगियों के भी फोन टैप कराये जाने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्रीय एजेंसियां कांग्रेसजनों को तरह-तरह से परेशान कर रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने इस आरोप को एक बार फिर दोहराया कि भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और उनके पुत्र साकेत बहुगुणा ने एक गैंग बनाकर उनकी चुनी हुई सरकार को गिरा दिया।
इस संबंध में, रावत ने आरोप लगाया कि कैलाश विजयवर्गीय के नेतृत्व में हुई इस नापाक साजिश में अब भाजपा में शामिल कांग्रेस के पूर्व नेता भूपेश उपाध्याय ने भी साथ दिया। दस मई को होने वाले शक्ति परीक्षण में विजय हासिल करने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी देवभूमि उत्तराखंड में गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ एक अभियान चलाएगी और उन्हें बेनकाब करेगी।
रावत ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, उनके पुत्र साकेत तथा भूपेश उपाध्याय की पत्नी पर रिषिकेश के आमबाग इलाके में टिहरी विस्थापितों को आवंटित हुई भूमि को हडपने में संलिप्त होने का भी आरोप लगाया और इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की भी मांग की।