नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन ने आतंकवाद से मुकाबला करने और उनको बढ़ावा देने वाले आतंकवादी समूहों तथा लोगों को न्याय की जद में लाने का सोमवार संकल्प जताया। इसके साथ ही दोनों देशों ने एक दूसरे के भौगोलिक क्षेत्र में भगोड़ों को कानून से बचने का मौका नहीं देने पर सहमति जताई। ब्रिटेन की प्रधानमंत्री के तौर पर टेरेसा मे यूरोप के बाहर अपने पहले द्विपक्षीय दौरे पर भारत आई हैं। उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से विस्तृत बातचीत की।
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अधिकारियों ने उन 57 भगोड़े लोगों की सूची ब्रिटेन को सौंपी जो भारत में वांछित हैं। साथ ही उद्योगपति विजय माल्या के जल्द प्रत्यर्पित किए जाने की उम्मीद भी जताई जो धनशोधन मामले में आरोप का सामना कर रहे हैं। करीब तीन घंटे की विस्तृत बातचीत के बाद दोनों प्रधानमंत्री व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने पर भी सहमत हुए और मे ने कहा कि उनकी यात्रा के दौरान ही भारत और ब्रिटेन के बीच एक अरब पाउंड (83,000 करोड़ रुपये) से ज्यादा के व्यापारिक सौदों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। मोदी के साथ संयुक्त रूप से मीडिया से बातचीत करते हुए मे ने व्यापार केंद्रित दो वीजा कार्यक्रमों (रजिस्टर्ड ट्रेवलर स्कीम और ग्रेट क्लब) की घोषणा की वहीं भारत ने उनका ध्यान अपने छात्रों और कामकाजी पेशेवरों पर ब्रिटेन के सख्त वीजा प्रावधानों के पड़ने वाले प्रभावों की ओर आकृष्ट किया।
आधिकारिक ब्रिटिश आंकड़ों के अनुसार भारतीय नागरिकों को जारी किए गए स्टडी वीजा की संख्या घटकर 11,864 रह गई जो 2010 में 68,238 थी। दोनों नेताओं ने व्यापार को बढ़ावा देने और वीजा व्यवस्था को सरल बनाने के अलावा सुरक्षा तथा रक्षा सहयोग सहित विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया। दोनों नेताओं ने साझा हितों वाले क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। उन्होंने दक्षिण एशिया को स्थिर, खुशहाल और आतंकवाद से मुक्त होने की आवश्यकता पर भी बल दिया तथा सभी देशों से इस लक्ष्य की दिशा में काम करने का आह्वान किया।