
पैदल चलना
अब उनके पास ट्रेडमिल के लिए तो वक्त नहीं है इसलिए वह अपने चुनावी दौरों में रोज कम से कम 5 किलोमीटर पैदल चलती हैं।
‘मैं ही हूं पार्टी’
वे अपनी पार्टी की स्टार प्रचारक हैं और मानती हैं कि लोग तृणमूल कांग्रेस को उन्हीं की वजह से वोट देते हैं। वे वोटरों को भरोसा दिलाती है कि उनकी पार्टी को इसलिए वोट देना चाहिए क्योंकि तृणमूल का चेहरा वे खुद हैं। ‘दुशो चुरा-नोबोई सीटे आमिई प्रार्थी (सभी 294 सीटों पर मैं ही प्रत्याशी हूं)।’
भीड़ की ताकत
यह अंदाजे-बयां अब ममता बनर्जी की पहचान बन गया है। एक पल के लिए वे तुनकमिजाज-भावुक हो सकती हैं और दूसरे ही पल रौद्र रूप धारण करके आग उगल सकती है। मगर वे जिस भी अवतार में हों, भीड़ उन्हें हाथोहाथ लेती है। वे ‘सदाबहार दीदी’ बन जाती है जो अच्छे वक्त और खराब वक्त में भी उम्मीद और जरुरत के समय हमेशा आपके साथ होती हैं।