नई दिल्ली: केन्द्र ने अरूणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के लिए कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को जिम्मेदार ठहराते हुए आज कहा कि इन मामलों में न्यायालय के फैसलों में केन्द्र की भूमिका पर कोई टिप्पणी नहीं की गयी है।
गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने राज्यसभा में अरूणाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हाल के घटनाक्रमों और राज्यपालों की भूमिका पर राज्यसभा में हुई अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि वह इन घटनाक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि इनके मामले उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इन मामलों में केन्द्र सरकार की भूमिका पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से तीन राज्यों में धारा 356 का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि कांगे्रस ने आरोप लगाया कि इन तीनों राज्यों में राज्यपाल आरएसएस से जुड़े थे। रिजिजू ने कहा कि दिल्ली एवं उत्तराखंड के राज्यपाल पूर्व सरकार ने नियुक्त किये थे। साथ ही तीनों राज्यों के राज्यपाल पूर्व में नौकरशाह थे जिनका किसी राजनीतिक पार्टी से कोई संबंध नहीं था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राज्यपालों के बारे में गलत तथ्य देकर सदन को गुमराह करने के लिए सदन एवं देश से माफी मांगनी चाहिए। रिजिजू ने कहा कि उत्तराखंड एवं अरूणाचल प्रदेश का घटनाक्रम पूरी तरह से कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अरूणाचल प्रदेश के असंतुष्ट कांग्रेस विधायक चार माह से दिल्ली में डेरा जमाए हुए थे किन्तु कांग्रेस आलाकमान द्वारा उनकी नेतृत्व परिवर्तन की मांग को नहीं माना गया।
उन्होंने कहा कि यह बेहद बिल्कुल निराधार और काल्पनिक आरोप है कि अरूणाचल प्रदेश में जो कुछ भी घटनाक्रम हुआ, उसके मूल में मैं हूं। उन्होंने कहा कि अरूणाचल प्रदेश के घटनाक्रम पूरी तरह से कांग्रेस का अंदरूनी मामला हैं। उसे इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। गृह राज्यमंत्री ने कहा कि चर्चा के दौरान कांग्रेस के कपिल सिब्बल ने देश में कांग्रेस शासन के दौरान लगाये गये आपातकाल को यह कहकर सही साबित करने का प्रयास किया है कि कुछ समय बाद कांग्रेस फिर से निर्वाचित होकर शासन में आयी। उन्होंने कहा कि आपातकाल को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता।
इससे पहले विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि चूंकि रिजिजू अरूणाचल प्रदेश से निर्वाचित होकर लोकसभा में आये हैं तथा ऐसे आरोप हैं कि अरूणाचल के हाल के घटनाक्रमों के मूल में वही थे, इसलिए बेहतर होगा कि इस चर्चा का जवाब उनकी जगह गृह मंत्री राजनाथ सिंह दें। उन्होंने कहा कि सरकार यदि इस चर्चा का जवाब किसी और दिन देना चाहे तो पार्टी इसके लिए तैयार है। आजाद ने स्पष्ट किया कि वह रिजिजू पर व्यक्तिगत रूप से कोई आक्षेप नहीं कर रहे हैं तथा मंत्री के रूप में उनकी क्षमता पर भी कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं।
कांग्रेस के आनंद शर्मा एवं प्रमोद तिवारी ने भी आजाद की राजनाथ सिंह से चर्चा का जवाब दिलवाने की मांग का समर्थन किया। संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वह चर्चा का जवाब किसी और दिन कराये जाने की मांग से असहमत नहीं हैं किंतु रिजिजू जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम हैं और उनकी भूमिका के बारे में लगाये गये आरोप सरासर गलत हैं। कई अन्य दलों के सदस्यों ने भी चर्चा का रिजिजू से ही जवाब कराये जाने का समर्थन किया।
उपसभापति पी जे कुरियन ने कांग्रेस की मांग को खारिज करते हुए कहा कि सरकार सामूहिक जिम्मेदारी से चलती है तथा रिजिजू इस चर्चा का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम हैं। इसके बाद जब रिजिजू चर्चा का जवाब दे रहे थे तो कांग्रेस सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करते रहे। बाद में कांग्रेस सदस्य सदन से वॉकआउट कर गये।