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बिहार के किंग महेंद्र हैं देश के दूसरे सबसे अमीर सांसद, 1985 से हैं राज्यसभा सदस्य

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 14, 2018 02:30 pm IST,  Updated : Mar 14, 2018 02:30 pm IST

सोमवार को राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा दाखिल करने वाले किंग महेंद्र ने अपने शपथ पत्र में यह जानकारी दी है कि उनके पास चार हजार करोड़ रुपए की चल संपत्ति तथा 29।10 करोड़ की अचल संपत्ति है जबकि बतौर नकदी उनके पास मात्र दो लाख रुपए हैं।

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बिहार के किंग महेंद्र हैं देश के दूसरे सबसे अमीर सांसद, 1985 से हैं राज्यसभा सदस्य

नई दिल्ली: 58 सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपने-अपने कोटे के उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। दल यूनाइटेड यानी जदयू ने बिहार से महेंद्र प्रसाद सिंह, जो किंग महेंद्र के नाम से भी जाने जाते हैं, को राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में तीसरी बार चुना है। किंग महेन्द्र जीतते हैं तो लगातार 7वीं बार राज्य सभा के सदस्य बनेंगे। वह एक साल के भीतर 84 देशों का भ्रमण कर चुके हैं।

सोमवार को राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा दाखिल करने वाले किंग महेंद्र ने अपने शपथ पत्र में यह जानकारी दी है कि उनके पास चार हजार करोड़ रुपए की चल संपत्ति तथा 29।10 करोड़ की अचल संपत्ति है जबकि बतौर नकदी उनके पास मात्र दो लाख रुपए हैं। हथियारों के शौकीन किंग महेंद्र के पास रिवॉल्वर, राइफल और बंदूक भी है। दिल्ली के बैंकों में उनके 1300 करोड़ रुपए जबकि मुंबई के बैंकों में 900 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा है।

गौरतलब है कि किंग महेंद्र दो फार्मास्यूटिकल कंपनी के मालिक हैं- मैप्रा लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड और अरिस्टो फार्मास्यूटिकल। किंग महेंद्र ने 1980 में पहली बार जहानाबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर संसद में प्रवेश किया था मगर 1984 में राजीव गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की लहर होने के बाद भी वह नहीं जीत पाए थे। मूलरुप से बिहार के जहानाबाद के गोविंदपुर गांव रहने वाले हैं किंग महेंद्र जिनका कारोबार कई देशों में फैला हुआ है।

वर्ष 1980 में जहानाबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले किंग महेन्द्र ने समय-समय पर अपनी राजनीतिक रसूख का परिचय दिया है। वर्ष 1984 में जब वो चुनाव हार गये। इसके बाद जनता को किंग महेंद्र की पहुंच और ताक़त का एहसास तब हुआ, जब वह राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नॉमिनेट कर लिये गये। इसके बाद चाहे लालू प्रसाद की सरकार रही हो या नीतीश कुमार की, किंग महेंद्र राज्यसभा के लिए चुने जाते रहे।

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