उनका एक खास शौक है, बड़े-बड़े आन्दोलनकारियों की जीवनियां पढना और राजनीतिक चर्चा करना।
एनडीए की 2004 लोकसभा चुनाव मे करारी हार के बाद वे यूपीए के शासन काल में गृह मन्त्री बनना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस के दबाव के बाद रेलमन्त्री बनने को राजी हुए। हालाकि लालू ने रेलवे को मुनाफे में लाकर सबको चकित कर दिया।
आलोचक उनके बारे में चाहे कुछ भी कहें लेकिन लालू एक हाजिर जवाब और जमीन से जुड़े नेता है, जिनका एक अच्छा खासा जनाधार है।