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मोदी सरकार हमें सत्ता से हटाना चाहती है : केजरीवाल

 Written By: IANS
 Published : May 17, 2015 06:54 pm IST,  Updated : May 17, 2015 06:55 pm IST

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को एक शीर्ष दिल्ली अधिकारी की नियुक्ति पर चल रहे विवाद को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा। केजरीवाल ने कहा कि इस अधिकारी की

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मोदी सरकार हमें सत्ता से हटाना चाहती है : केजरीवाल

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को एक शीर्ष दिल्ली अधिकारी की नियुक्ति पर चल रहे विवाद को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा। केजरीवाल ने कहा कि इस अधिकारी की नियुक्ति उनकी सरकार को सत्ता से हटाने के लिए असंवैधानिक तरीके से की गई है। राजधानी दिल्ली के बुराड़ी में हजारों की संख्या में जुटे ऑटोरिक्शा चालकों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कार्यवाहक मुख्य सचिव शकुंतला गेमलिन की नियुक्ति के विवादास्पद मुद्दे को उठाया, लेकिन उन्होंने उसका नाम नहीं लिया।

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा गेमलिन को कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने के बाद आप नेताओं ने उनकी निंदा की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय से सीधे तौर पर जुड़े जंग ने इस विवाद से पीछे हटने से इनकार कर दिया। वहीं केंद्र सरकार ने केजरीवाल पर महिला अधिकारी को बदनाम करने का आरोप लगाया।

ऑटोरिक्शा रैली में केजरीवाल ने कहा, "हम सचिव शकुंतला गेमलिन की नियुक्ति का विरोध करते हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने उन्हें दिल्ली का कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त किया है। दीअसल, मोदी सरकार हमें सत्ता से हटाना चाहती है।"

केजरीवाल ने महिला अधिकारी पर बिजली वितरण कंपनियों से जुड़े होने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, "जब आप ने फरवरी में दिल्ली में सरकार का गठन किया, दिल्ली सरकार के बिजली विभाग में तैनात सचिव शकुंतला ने हमारे ऊर्जा मंत्री से बिजली कंपनियों को 11,000 करोड़ रुपये का ऋण दिलाने के लिए उन पर जोर देकर दस्तखत कराने की कोशिश की थी। वह चाहती थीं कि हमारा मंत्री बिजली कंपनियों को बैंकों से ऋण दिलाने के लिए इस पत्र पर हस्ताक्षर करे। उन्होंने हमसे बिजली कंपनियों का समर्थन करने और आम आदमी पर बोझ डालने को कहा था।"

केजरीवाल ने कहा, "यह हमारे मंत्री की ईमानदारी थी कि उन्होंने गारंटी पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए, वरना यदि बिजली कंपनियां ऋण का भुगतान करने में असफल रहतीं तो दिल्ली में बिजली के दामों में दो से तीन गुना बढ़ोतरी हो गई होती, जिससे यहां की जनता पर बोझ पड़ता।"

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