तिरूवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव में माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार ने आज शपथ ली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो सदस्य पिनाराई विजयन ने बुधवार को यहां सेंट्रल स्टेडियम मैदान में केरल के 22वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। केरल के राज्यपाल पी.सतशिवम ने 18 कैबिनेट मंत्रियों को भी शपथ दिलाई, जिनमें 11 माकपा, चार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), कांग्रेस (सेक्यूलर) के एक, जनता दल (सेक्यूलर) के एक तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के एक मंत्री शामिल हैं।
ऐसा दूसरी बार हो रहा है, जब शपथ ग्रहण समारोह परंपरागत रूप से राजभवन में न होकर उसके बाहर आयोजित हुआ। राज्य में 16 मई को हुए चुनाव में माकपा नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) ने कुल 140 सीटों वाली राज्य विधानसभा में 91 सीटों पर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ ही ओमन चांडी की कांग्रेस नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार सत्ता से बाहर हो गई।
सख्त टास्कमास्टर की छवि रही है पी विजयन की
एक गरीब परिवार से नाता रखने वाले पिनराई विजयन की छवि एक सख्त टास्कमास्टर की है जिनकी संगठन पर खासी पकड़ रही है। विजयन (72 साल) दक्षिणी प्रदेश में संभवत: अकेले पार्टी नेता हैं जिनका 16 साल तक पार्टी पर पूरा नियंत्रण रहा। उनका यह नियंत्रण पिछले साल तब तक रहा जब तक वह राज्य सचिव के पद पर रहे।
पिनराई के नाम से लोकप्रिय विजयन ने केरल विधानसभा में वाम की जीत सुनिश्चित करने के लिए 93 वर्षीय नेता वी एस अच्युतानंदन द्वारा जोशपूर्ण प्रचार किए जाने के बाद भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उन्हें पीछे छोड़ दिया। वे माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य हैं जो राजनीतिक रूप से प्रभावशाली थिया समुदाय से आते हैं जबकि पार्टी में उनके प्रतिद्वंद्वी अच्युतानंदन दक्षिण केरल के एझावा समुदाय से आते हैं।