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‘इशरत केस से जुड़े कई दस्तावेज गायब, पिछली सरकार में हुई गड़बड़ी'

 Written By: Bhasha
 Published : Mar 10, 2016 02:58 pm IST,  Updated : Mar 10, 2016 04:03 pm IST

लोकसभा में आज इशरत जहां मुठभेड़ मामले में दायर हलफनामों पर बोलते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन इशरत जहां केस की जांच में फ्लिप फ्लॉप हुआ है।

rajnath singh- India TV Hindi
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नई दिल्ली: लोकसभा में आज इशरत जहां मुठभेड़ मामले में दायर हलफनामों पर बोलते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, लेकिन इशरत जहां केस की जांच में फ्लिप फ्लॉप हुआ है। राजनाथ ने लोकसभा में कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछली संप्रग सरकार ने इशरत जहां मामले में अपने रुख बदले थे। गृह मंत्रालय इशरत जहां मामले में आंतरिक स्तर पर जांच कर रहा है और सभी तथ्यों को एकत्रित करने के बाद सोच-समझकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इशरत जहां मामले में पिछली संप्रग सरकार पर फ्लिप फ्लॉप करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा करना गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने और फंसाने की गहरी साजिश का हिस्सा था और मामले की तह तक जाकर इस बारे में अंतिम निर्णय किया जाएगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गृह मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि इशरत को पहले आतंकी बताने और बाद में उससे पीछे हट जाने संबंधी दो हलफनामे किन परिस्थितियों में दाखिल किए गए।

उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में कुछ दस्तावेज लापता हैं। लेकिन मंत्रालय के स्तर पर आंतरिक छानबीन की जा रही है और सारे तथ्य एकत्रित किये जा रहे हैं जिसके बाद सोच-समझकर अंतिम निर्णय पर पहुंचा जाएगा। लोकसभा में कुछ सदस्यों द्वारा इशरत जहां मामले से सबंधित शपथपत्र मैं कथित फेरबदल के बारे में पेश ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब में सिंह ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा, पिछली संप्रग सरकार ने इस तथ्य पर पर्दा डालने का प्रयास किया कि इशरत जहां लश्कर ए तैयबा आपरेटिव थी, हालांकि अपने पहले हल्फनामे में उसने यह बात स्वीकार की थी लेकिन एक महीने बाद ही उस हलफनामे को बदल दिया।

उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमले के षडयंत्रकारी डेविड कोलमैन हेडली की गवाही से साबित हो गया है कि इशरत के लश्कर ए तैयबा से संबंध थे जैसा कि संप्रग सरकार के समय के पहले हलफनामे में भी स्वीकार किया गया था। सिंह ने कहा कि पहले इशरत को लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेटिव बताने वाला हलफनामा छह अगस्त 2009 को गुजरात उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया था लेकिन अगले महीने ही 24 सितंबर को दूसरा हलफनामा दाखिल कर उसे आतंकवादी मानने से इनकार कर दिया गया।

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