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'आर्गेनाइजर' ने अखिलेश सरकार को आड़े हाथों लिया, कहा- कैराना में ISI का हाथ संभव

 Written By: Bhasha
 Published : Jun 15, 2016 08:44 am IST,  Updated : Jun 15, 2016 08:44 am IST

RSS समर्थक पत्रिकाओं ‘आर्गेनाइजर’ और ‘पांचजन्य’ में कैराना पलायन और मथुरा हिंसा मुद्दों को रेखांकित करते हुए सत्ताधारी सपा सरकार पर जोरदार हमला किया गया है।

Akhilesh Yadav- India TV Hindi
Akhilesh Yadav

नई दिल्ली: जब विभिन्न पार्टियां राजनीतिक रूप से संवेदनशील उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है, RSS समर्थक पत्रिकाओं ‘आर्गेनाइजर’ और ‘पांचजन्य’ में कैराना पलायन और मथुरा हिंसा मुद्दों को रेखांकित करते हुए सत्ताधारी सपा सरकार पर जोरदार हमला किया गया है। दोनों पत्रिकाओं में उत्तर प्रदेश में बढ़ती अराजकता को उल्लेखित करते हुए कैराना पलायन और मथुरा हिंसा पर ‘आवरण कथा’ प्रकाशित की है। ‘आर्गेनाइजर’ में प्रकाशित आवरण कथा में कैराना से पलायन पर लेख है और इसकी तुलना कश्मीर की स्थिति से की गई है जहां से पंडितों का पलायन हुआ था।

इसमें दावा किया गया है कि पिछले कुछ वर्षों से एक समृद्ध जिले के तौर पर शामली की पहचान असामाजिक तत्वों के ‘जनसांख्यिकीय आघातों’ के चलते खतरे में हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि इसके कारण कैराना के 350 से अधिक हिंदू परिवार अपना सम्पन्न कारोबार छोड़कर अपने पैतृक घर त्यागने को मजबूर हुए हैं। लेख में कहा गया है कि उत्पीड़न के प्रकरणों और अपराधीकरण का पाकिस्तान की गुप्तचर एजेंसी ISI से संबंध होने का संदेह है।

जनवरी 2015 में उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ युवाओं के ISI से संबंध के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था। ये कथित संबंध चीजों को देश की सुरक्षा के लिए और अधिक खतरनाक बनाते हैं। इसमें कहा गया है कि प्रशासन हो सकता है कि इनकार की मुद्रा में हो। राजनेता आरोप एवं प्रत्यारोप में व्यस्त हैं लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन क्षेत्रों से जो मुद्दे सामने आ रहे हैं वे हिंदुओं के मानवाधिकार उल्लंघन तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़े हुए हैं। इन्हें नजरंदाज करने की कीमत न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि देश को भी चुकानी पड़ सकती है।

मथुरा हिंसा को रेखांकित करते हुए एक अन्य लेख में कहा गया है कि वर्तमान में हम बड़ी संख्या में समर्पित अनुयायियों वाले संदिग्ध संप्रदायों के सिंड्रोम देख रहे हैं। संत रामपाल से रामवृक्ष यादव तक हम इन व्यक्तिगत रूपों की शक्ति एवं ताकत के कारणों के बारे में आश्वस्त नहीं है। मथुरा की हाल की घटना और रामवृक्ष की कहानी इस सिंड्रोम पर कुछ प्रकाश डालती है।

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