नई दिल्ली: एक तरफ जहां सपा-बसपा और बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपनी-अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार का दावा कर रही हैं तो वहीं सट्टा बाजार में हवा साफ नजर आ रही है। सट्टा बाजार में जो दांव खेले जा रहे हैं वहां बीजेपी अपने विरोधियों पर भारी पड़ती नजर दिख रही है।
देश का कामकाज छोड़ तीन दिन तक वाराणसी में चुनाव प्रचार करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही विरोधियों के निशाने पर हों लेकिन सटोरियों की मानें तो उनके इस धुंआधार प्रचार से उत्तर प्रदेश चुनाव की तस्वीर बदल गई है। शुरुआती दौर में दूसरे नंबर पर दिख रही बीजेपी 8 मार्च को आखिरी चरण का मतदान पूरा होते ही नंबर एक पर नजर आने लगी है। हालांकि बीजेपी को कुल कितनी सीटें मिलेंगी और बहुमत मिलेगा या नहीं, इसे लेकर सट्टा बाजार भी दुविधा में है। इसलिए अलग-अलग सीटों के लिए अलग-अलग भाव खुला है।
सूत्रों के मुताबिक पूर्वांचल के सट्टा बाजारों में चुनाव के पहले चरण के नामांकन तक 210 से 215 सीटों के साथ एसपी-कांग्रेस गठबंधन को पूर्ण बहुमत के दावे किए जा रहे थे। वोटिंग का दौर आया तो हर चरण में बीजेपी समेत गठबंधन और बीएसपी का भाव विदेशी बाजार में क्रूड ऑयल की तरह गिरता-चढ़ता रहा।
अंतिम दौर में सट्टा बाजार में 'कमल' ब्रैंड का जोर दिखा। तीसरे राउंड तक पीछे रहने वाली बीजेपी को गुरुवार को खुले नए भाव में 188 से 190 और एसपी गठबंधन को 125 से 130 तक सीटें मिलने की संभावना पर बनारस में ही 25 करोड़ से ज्यादा का सट्टा लगा है।
बीएसपी को सट्टेबाजों ने शुरुआती दौर से ही अंडर एस्टिमेट किया। बीएसपी के लिए कभी सौ से ज्यादा का भाव खुला ही नहीं और अंतिम दौर में 80 पर टिका तो टिक ही गया। हालांकि राजनीति के जानकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। इनकी मानें तो बीएसपी दलित-मुस्लिम वोटों की गठरी से 'साइलेंट किलर' के रूप में सामने आ सकती है।
सट्टा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अलावा पंजाब, उत्तराखंड और गोवा विधानसभा चुनाव पर भी लगा है। बीजेपी उत्तर प्रदेश के साथ गोवा और उत्तराखंड में भी आगे दिख रही है जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी आगे है। सटोरियों का दावा है कि मतगणना 11 मार्च को है इसलिए 10 मार्च की रात तक भाव में थोड़ा फेरबदल होता रहेगा।