मुंबई: शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना में सुधींद्र कुलकर्णी पर सीधा हमला करते हुए उन्हें आतंकी कसाब से ज्यादा खतरनाक बताया गया है। कसूरी-कुलकर्णी मामले के बाद शिवसेना की BJP से नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। पाकिस्तान को लेकर BJP के रवैये से शिवसेना नाराज है। साथ ही शिवसेना ने सुधींद्र कुलकर्णी पर स्याही पोतने वाले शिवसैनिकों का बचाव करते हुए कार्यकर्ताओं को राष्ट्रभक्त बताया है।
हालांकि BJP शिवसेना की नाराजगी को ज्यादा महत्व नहीं दे रही है। CM फड़नवीस ने शिवसेना को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि राज्य में अराजकता की कोई जगह नहीं है।
'कसाब से खतरनाक कुलकर्णी'
सुधींद्र कुलकर्णी जिस प्रकार से अपना काला चहरा लेकर आनंद और अभिमान से घूम रहे हैं, वह उनकी बेशर्मी की हद है। पाकिस्तान की चमचागीरी करने वाले का थोबड़ा राष्ट्रभक्त जनता ने काला कर दिया और उसके लिए जनता आनंद के साथ तालियां भी बजा रही है। इस पाकिस्तानी एजेंट पर काली स्याही पोती गई या डामर पोता गया अभी तय होना है लेकिन पाकिस्तानियों के लिए देश को गिरवी रखने वालों को इसके आगे काला थोबड़ा ही लेकर घूमना होगा। देशनिष्ठा और देश का संरक्षण यह महाराष्ट्र का धंधा है और शिवसेना यही धंधा पूरी ईमानदारी से कर रही है। हमारे देश को असली खतरा धर्मांध आतंकवादी मुसलमानों की बजाय सुधींद्र कुलकर्णी जैसे छिछोरे पतितों से है। 100 कसाब मिलकर वो काम नहीं कर सकते हैं वो नापाक काम कुलकर्णी जैसे फिसड्डी बम हिन्दुस्तान में कर रहे होते हैं।
BJP-शिवसेना रिश्तों पर पड़ा असर
सुधींद्र कुलकर्णी पर कालिख का काला साया महाराष्ट्र में BJP-शिवसेना गठबंधन पर पड़ता दिख रहा है। सीएम फड़नवीस ने शिवसेना को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि राज्य में अराजकता की कोई जगह नहीं है। CM फड़नवीस के कड़े रुख से शिवसेना एक बार फिर नाराज है। दरअसल पिछले कुछ समय से शिवसेना कई बार महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठा चुकी है।
BJP और शिवसेना के रिश्तों में खटपट महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है दिल्ली में भी कई मुद्दों पर दोनों पार्टियों के बीच घमासान मचा हुआ है। मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनंत गीते को सौंपे गए मंत्रालय से भी शिवसेना खुश नहीं है। साथ ही कैबिनेट के विस्तार में शिवसेना एक और मंत्रालय के इंतजार में थी लेकिन उसे निराशा हाथ लगी। दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद उद्धव ठाकरे के बयान से भी दोनों के रिश्तों में तल्खी आ गई। इसके अलावा दोनों पार्टियां का रुख लैंड बिल के मुद्दे पर भी अलग-अलग था।
पहले गुलाम अली फिर खुर्शीद महमूद कसूरी का विरोध से ये बात साबित हो गई है कि शिवसेना उग्र विरोध की राजनीति छोड़ने वाली नहीं है, वो विरोध दर्ज कराती रहेगी और महाराष्ट्र में सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी करती रहेगी।