नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा शनिवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बयान जारी किए जाने के बाद बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आयोग पर हमला करने के लिए अपने आरोपों का आधार एक ''गढ़े हुए झूठ'' को बनाया। नितिन नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''एसआईआर के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने को लेकर विपक्ष एक बार फिर बेनकाब हो गया है।''
संवैधानिक संस्थाओं पर हमला किया-नवीन
भाजपा प्रमुख नवीन की यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है, जब चुनाव आयोग के बयान में कहा गया कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी से जारी किए गए थे और मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। बीजेपी अध्यक्ष ने आरोप लगाया, ''चुना आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR से जुड़ा हर फैसला आयोग ने सर्वसम्मति से लिया था। फिर भी, कांग्रेस ने एक मनगढ़ंत झूठ के आधार पर आरोप लगाए और हमारी संवैधानिक संस्थाओं पर हमला किया।''
''दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार'' का सहारा लेना ''बेहद दुर्भाग्यपूर्ण''
नवीन ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का पाखंड वाला रवैया इस बात से स्पष्ट है कि जब यही चुनावी प्रक्रिया केरलम और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उन्हें जीत दिलाती है, तो वे इसकी विश्वसनीयता को सहज ही स्वीकार कर लेते हैं। उन्होंने कहा, ''लेकिन जब अन्य जगहों पर जनादेश उनके खिलाफ जाता है, तो वे उन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं जो ये चुनाव कराती हैं। लोकतंत्र का सम्मान चुनिंदा तौर पर नहीं किया जा सकता।'' भाजपा प्रमुख ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन सम्मानित संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने के लिए ''दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार'' का सहारा लेना ''बेहद दुर्भाग्यपूर्ण'' है।
बता दें कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों और एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आज अपना आधिकारिक बयान जारी किया है। चुनाव आयोग ने चुनाव आयुक्तों की असहमति विवाद पर बिंदुवार स्पष्टीकरण जारी किया है। भारत निर्वाचन आयोग के महानिदेशक (मीडिया) आशीष गोयल ने बयान जारी करते हुए कहा, "आज, 26 सितंबर 2026 को दोपहर 3:00 बजे नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में भारत निर्वाचन आयोग की बैठक हुई। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही लिए गए हैं।
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