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"आतंकवाद फैलाने वाले अपनी हरकतें सुधारे" UNGA में जयशंकर ने पाकिस्तान को दी चेतावनी

 Written By: Kajal Kumari
 Published : Sep 26, 2026 11:11 pm IST,  Updated : Sep 27, 2026 12:42 am IST

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेकनाब कर दिया। पीएम शहबाज शरीफ का नाम लिए बिना क्या कहा, जानिए...

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर- India TV Hindi
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर Image Source : PTI

न्यूयॉर्क में भारत के ​विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए बड़ी बात कही। एस. जयशंकर ने कहा, "कल, आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने इस सभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया। आतंकवाद को सामान्य बताने और उसके नतीजों से बचने के लिए तर्क दिए गए। ये तर्क टिक नहीं पाएंगे। आतंकवाद के खिलाफ खुद का बचाव करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल किया जाएगा। दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकती, और ऐसी सोच पर आधारित समझौतों पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। अब यह आतंकवाद फैलाने वाले पर निर्भर है कि वह अपनी हरकतें सुधारे..."

एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच संयम बरतने, तनाव कम करने और आम नागरिकों की बेहतर सुरक्षा की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि युद्ध के नतीजे उन देशों तक भी महसूस किए जा रहे हैं जो सीधे तौर पर इस युद्ध में शामिल भी नहीं हैं। एस जयशंकर ने कहा कि युद्ध वैश्विक सुरक्षा और विकास को कमजोर कर रहे हैं और युद्ध वाले इलाकों से दूर स्थित देशों को भी इनके नतीजे भुगतने पड़ रहे हैं। 


नाविकों पर निशाना बनाना हमें मंजूर नहीं है
इस युद्ध का जिन पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है। इस सभा को हालात की असलियत का सामना करना होगा। इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं, जिससे पहले से ही मुश्किल हालात और बिगड़ रहे हैं। जारी तनाव को लेकर हम बहुत चिंतित हैं। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुज़रने वाले कमर्शियल जहाज़ों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल भी मंज़ूर नहीं है। भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा व व्यापार का प्रवाह बिना किसी रुकावट के जारी रखने की अपील करता है..."

युद्ध प्रगति के लिए खतरा, पूरी दुनिया पर इसका असर
उन्होंने कहा, "हम इस महासभा में तब इकट्ठा हुए हैं जब संयुक्त राष्ट्र अपने नौवें दशक में प्रवेश कर रहा है। इसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने और इसके लिए सामूहिक कार्रवाई करने के उद्देश्य से की गई थी। सदस्य देशों ने दोस्ताना संबंध विकसित करने और वैश्विक शांति को मजबूत करने का संकल्प लिया था। फिर भी, जब हम यहां मिल रहे हैं, तब भी संघर्ष और टकराव ही हमारी मुख्य चिंता बने हुए हैं। शांति बनाए रखने में विफलता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति के लिए खतरा पैदा कर रही है और विकास को भी बाधित कर रही है। आज की वैश्वीकृत दुनिया में, युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।"


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