वीडियो साभार- लोकसभा टीवी
- स्मृति ईरानी ने जेएनयू के दो प्रोफेसरों के खिलाफ दस्तावेजों के साथ सबूत पेश किया और कहा कि ये प्रोफेसर कश्मीर की आजादी के नारे बुलंद करते हैं...देश का अपमान करते हैं। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के खिलाफ आवाज उठाते हैं। स्मृति ने कहा कि जेएनयू छात्र संघ के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार के दिमाग में देशविरोधी विचारों का जहर भरा गया। उसे मोहरा बना कर इस्तेमाल किया गया।
- उन्होंने कहा कि टीएमसी और कम्युनिस्ट पार्टी के उन नेताओं पर भी निशाना साधा। स्मृति ने कहा कि दिल्ली में महिषासुर शहीदी दिवस मनाने वाले लेफ्ट के नेता क्या वामपंथ के गढ़ माने जाने वाले कोलकाता में ऐसा आयोजन कर सकते हैं।
- एचआरडी मिनिस्टर ने सदन में प्राइमरी स्कूल की एक टेक्स्टबुक दिखाई। इस किताब को तीस्ता सीतलवाड़ ने लिखा है। स्मृति ने आरोप लगाया कि इस किताब में छत्रपति शिवाजी की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की गई। स्मृति ने एक ऐसी टेक्स्टबुक का उदाहरण भी दिया, जिसमें कश्मीर के बारे में गलत तथ्य पेश किए गए हैं।
- जेएनयू के बारे में बोलते हुए जब स्मृति ईरानी ने ये बताया कि चौथी और छठी के बच्चों को तीस्ता सीतलवाड़ की लिखी किताबें पढाई जाती हैं। ऐसी किताबें जिसमें भारतीय सेना के खिलाफ और कश्मीर मिलिटेंट के समर्थन में बातें कही गई है। ऐसी किताबें जिसमें शिवाजी की देशभक्ति पर सवाल उठाए गए हैं और इतिहास बताने के लिए पाकिस्तान के लेखकों को quote किया गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि ये किताबें उस समय लागू की गई थी जब कपिल सिब्बल एचआरडी मिनिस्टर थे। स्मृति ईरानी की बात सही है कि अगर हम चौथी और छठी क्लास में पढने वाले बच्चों के दिमाग में जहर भरेंगे तो फिर जेएनयू में मुल्क को तोड़ने के नारे लगेंगे तो आश्चर्य क्यों होगा।