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आसनसोल उत्तरी में त्रिकोणीय मुकाबला, भाजपा को बढ़त

 Written By: Bhasha
 Published : Apr 09, 2016 02:40 pm IST,  Updated : Apr 09, 2016 02:40 pm IST

पश्चिम बंगाल की आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट पर कभी भी एक पार्टी विशेष का कब्जा नहीं रहा है और इस बार सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और माकपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ यहां भाजपा का त्रिकोणीय मुकाबला है जिसमें भाजपा को जीत की उम्मीद है।

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आसनसोल (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल की आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट पर कभी भी एक पार्टी विशेष का कब्जा नहीं रहा है और इस बार सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और माकपा-कांग्रेस गठबंधन के साथ यहां भाजपा का त्रिकोणीय मुकाबला है जिसमें भाजपा को जीत की उम्मीद है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में बयार चली थी और इस विधानसभा क्षेत्र में उसने भारी बढ़त हासिल की थी। पार्टी की ओर से यहां से चुनाव लड़ रहे निरमल करमाकर का मानना है कि यह बयार अभी भी जारी है और इससे उन्हें फायदा होगा । पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी के सांसद, गायक से राजनेता बने बाबुल सुप्रियो की सफलता और उनके द्वारा किये गये कई विकास कार्यों की शुरूआत के रथ पर सवार होकर करमाकर सफलता दोहराने की उम्मीद कर रहे हैं।

सुप्रियो केन्द्र सरकार में शहरी विकास राज्यमंत्री भी हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आसनसोल-रायगंज कोयला क्षेत्र में भारी प्रचार अभियान चलाया था जहां पर झारखंड और बिहार के हिन्दी बोलने वाले मतदाता और अप्रवासी श्रमिक भारी संख्या में रहते हैं। तृणमूल कांग्रेस ने यहां से अपने श्रम मंत्री मलय घटक को जबकि माकपा-कांग्रेस गठबंधन ने इंद्राणी मिश्रा को मैदान में उतारा है। इस विधानसभा क्षेत्र में 245118 मतदाता हैं और यहां 11 अप्रैल को मतदान होना है। सारदा घोटाले और नारद स्टिंग मसले के अलावा अवैध खनन और कोयला माफिया भी विपक्षी पार्टियों द्वारा विधानसभा क्षेत्र में उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण मुद्दे हंै। सत्तारूढ़ तृणकां अपने कन्याश्री और खाद्य साथी जैसे कार्यक्रमों के चलते मतदाताओं से मत मिलने की उम्मीद में है।

तृणकां के निर्वतमान विधायक मलय घटक ने 2011 में माकपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 47,000 मतों से हरा कर जीत दर्ज की थी। हालांकि पिछले पांच सालों में इलाके में राजनीतिक समीकरणों में उल्लेखनीय बदलाव आया है और भाजपा एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। पिछले लोकसभा चुनाव में कुल सात विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा ने पांच पर बढ़त हासिल की थी। इन विधानसभा सीटों पर भाजपा की बढ़त से लोकसभा चुनाव के बाद घटक को अपना मंत्री पद गंवाना पड़ा था। हालांकि उन्हें कुछ महीनों के बाद फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। घटक ने बताया कि वह इस सीट से भारी मतों से जीत को लेकर आश्वस्त हैं।

करमाकर ने पीटीआई भाषा को बताया, सांसद चुने जाने के बाद बाबुल सुप्रियो ने पिछले दो सालों में काफी काम किया है। ऐसे में, पहले ही लोगों ने विकास का स्वाद चख लिया है। हालांकि, तृणकां का स्थानीय नेतृत्व आरोप लगाता रहा है कि चुनाव जीतने के बाद सुप्रियो लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए कभी उपलब्ध नहीं रहे हैं। माकपा के प्रत्याशी मिश्रा ने बताया, हवा तृणकां के खिलाफ चल रही है और भ्रष्ट तृणकां शासन का विकल्प मुहैया कराने के लिए लोग कांगे्रस-माकपा गठबंधन की ओर देख रहे हैं। मेरी जीत सुनिश्चित करने के लिए माकपा कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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