नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर लेफ्टीनेंट गवर्नर नजीब जंग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दरअसल उपराज्यपाल की अनुमति से शुक्रवार को ऊर्जा सचिव IAS शकुंतला गैमलिन को कार्यकारी मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया था। लेकिन केजरीवाल नहीं चाहते थे कि शंकुतला गैमलीन को चीफ सेक्रेट्री की जिम्मेदारी दी जाए।
आप नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि, "नजीब जंग के पास कोई अधिकार नहीं है कि वो दिल्ली सरकार के किसी अधिकारी से सीधे बात कर सके।"
चीफ सेक्रेट्री शंकुतला गैमलीन मामले पर सिसोदिया ने कहा कि, नजीब जंग के सारे अधिकार मंत्रियों के ज़रिए है।
शंकुतला गैमलीन को उपराज्यपाल नजीब जंग ने अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए कार्यकारी मुख्य सचिव की जिम्मेदारी दी थी, जिसके बाद अरविंद केजरीवाल आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं।
गैमलिन ने केजरीवाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने अफसरों के जरिए उन्हें धमकी दी है। गैमलीन ने चिट्ठी लिखकर लेफ्टीनेंट गवर्नर से इसकी शिकायत की है।
इसके बाद केजरीवाल ने शकुंतला गैमलीन को दस दिनों के लिए कार्यकारी मुख्य सचिव बनाने का विरोध किया है। केजरीवाल
ने लैफटीनेंट गवर्नर नजीब जंग को चिट्ठी लिखकर उन पर संविधान के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया।
"लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास संविधान के तहत इस तरह के अधिकार नहीं हैं कि वो चुनी हुई सरकार को नजरअंदाज करें। और इस तरह सीधे सचिवालय को निर्देश दें। दिल्ली सरकार को शकुंतला गैमलीन के आचरण को लेकर कुछ आपत्तियां हैं... इसी वजह से दिल्ली सरकार उन्हें चीफ सेक्रेटरी का अतिरिक्त चार्ज देने में हिचकिचा रही थी। उनकी दिल्ली की बिजली कंपनियों से काफी नजदीकियां रही है। वो सरकार में रहते हुए बिजली कंपनियों के लिए लॉबिंग कर चुकी हैं.."
केजरीवाल के इस रवैये पर दिल्ली बीजेपी ने भी कड़ा एतराज जताया है। केजरीवाल के विरोध के बाद नजीब जंग ने भी एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि उन्हें संविधान के तहत चीफ सेक्रेटरी नियुक्त करने का पूरा अधिकार है। नजीब जंग ने कहा कि उन्होंने शकुंतला गैमलिन की सीनियरटी और ट्रैक रिकॉर्ड देखते हुए उनकी नियुक्ति की है।