एक पत्रकार द्वारा एक कश्मीरी बच्चे की तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। तस्वीर में बच्चा सुरक्षाकर्मियों पर ग़ुलेल से निशाना साधते हुए नज़र आ रहा है। पत्रकार ने जहां तस्वीर के बारे में लिखा, 'जवानों के साथ खेलता बच्चा' वहीं सोशल मीडिया ने इसे गंभीरता से लेते हुए इसकी आलोचना शुरु कर दी।

इस बहस में पूर्व IPS ऑफ़िसर संजीव भट्ट भी कूद गए जिन्होंने इस तस्वीर को अलग ही रुप में रेखांकित किया। उन्होंने ट्वीट कर आरोप लगाया कि कश्मीर में भयंकर गड़बड़ है जिसे दिल्ली ने कभी भी दुरुस्त करने की कोशिश नहीं की है। भट्ट के इस ट्वीट के बाद उन पर हमले शुरु हो गए।

लोगों ने पत्रकार को आड़े हाथों लेते हुए उस पर आरोप लगाया कि उसे इस बात का एहसास नहीं है कि ये कितना ख़तरनाक है कि बच्चों पर भी अलगाववादियों का असर हो रहा है।

पत्रकार पर जहां तस्वीर के पीछे असल संदेश की अनदेखी करने के आरोप लगे वहीं भट्ट पर एक बार फिर मोदी सरकार की आलोचना करने के आरोप लग रहे हैं।


भट्ट इसके पहले भी 2002 में गुरात दंगों में मोदी के कथितरुप से शामिल होने के आरोप की वजह से सुर्ख़ियों में रह चुके हैं। दंगों में करीब 1000 लोग मारे गए थे। अंग्रेज़ी दैनिक हिंदू के अनुसार दंगो में मोदी की भूमिका को लेकर हलफ़नामा दायर करने के बाद भट्ट को गुजरात सरकार ने निलंबित कर दिया था। इस बार भट्ट पर बच्चे की तस्वीर को लेकर सरकार को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है।
अन्य लोगों ने भट्ट पर नफ़रत और राष्ट्र विरोधी भावनाएं फ़ैलाने का आरोप लगाया है।